दिल्ली उच्च न्यायालय ने विमानन कंपनी इंडिगो और केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि फंसे हुए यात्रियों को बिना किसी देरी के मुआवजा दिया जाए और नियमों के अनुसार रिफंड एवं सहायता उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यात्रियों की सुविधा और अधिकारों से जुड़े मानकों का सख्ती से पालन होना चाहिए।
हवाई संकट के नौवें दिन भी स्थिति सामान्य नहीं हुई। दिल्ली सहित तीन बड़े हवाईअड्डों से बुधवार को भी 220 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जिससे यात्रियों की परेशानी बढ़ गई।
मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा कि एयरपोर्ट पर यात्रियों की सहायता के लिए क्या व्यवस्था की गई है। अदालत ने बताया कि रद्द उड़ानों और अव्यवस्था के कारण यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा है।
पीठ ने यह भी चिंता जताई कि संकट के बीच कई एयरलाइंस ने किराए में अचानक भारी बढ़ोतरी कर दी। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि किराए की सीमा पहले एक नियामक कदम के रूप में लागू की गई थी और स्थिति बिगड़ने के बाद मंत्रालय को हस्तक्षेप करना पड़ा।
इधर, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने इंडिगो के सीईओ पीटर एलबर्स और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को गुरुवार को तलब किया है। अधिकारियों को डीजीसीए कार्यालय में पायलट व क्रू की भर्ती योजना, उड़ान संचालन की वर्तमान स्थिति और रिफंड प्रक्रिया सहित विस्तृत जानकारी पेश करनी होगी।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणियाँ:
- आखिर ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई कि इंडिगो को बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द करनी पड़ीं?
- संकट का फायदा उठाकर अन्य एयरलाइंस को मनमाना किराया वसूलने की इजाज़त कैसे मिली?
- किराए में अचानक और अभूतपूर्व बढ़ोतरी को पहले से नियंत्रित क्यों नहीं किया गया?
- स्थिति तुरंत सामान्य की जाए, एयरलाइंस आवश्यक संख्या में पायलटों की नियुक्ति सुनिश्चित करें।


