बोधगया में त्रिपिटक पूजा का भव्य आगाज़: 27 देशों के बौद्ध श्रद्धालुओं की उपस्थिति, पूरी नगरी बुद्ध वंदना से गूंजी

बिहार की पवित्र ज्ञानभूमि बोधगया में मंगलवार को त्रिपिटक पूजा का भव्य शुभारंभ हुआ। बुद्ध की पावन धरती पर हजारों की संख्या में बौद्ध अनुवाई पहुंचे, जिनमें अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और कई देशों के बौद्ध धर्मगुरु शामिल रहे। इस विशेष आयोजन के दौरान पूरा बोधगया बुद्ध वंदना और शांति मंत्रों से गूंज उठा।

महाबोधि मंदिर परिसर और आसपास की सड़कों पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा, जहां विश्व शांति, करुणा और अहिंसा के संदेश के साथ विशेष अनुष्ठान किए जा रहे हैं।

27 से अधिक देशों की भागीदारी—भक्ति और आस्था का महासंगम

त्रिपिटक पूजा में 27 से अधिक देशों के नागरिकों ने हिस्सा लिया है। आयोजन की भव्यता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि—

  • हजारों श्रद्धालु पहले दिन ही पहुंचे
  • 10 दिनों में करीब 2 करोड़ बौद्ध श्रद्धालुओं के आने की संभावना
  • महाबोधि मंदिर परिसर में लगातार चल रही शांतिपाठ, पूजा और विशेष प्रार्थनाएं

यह आयोजन बोधगया को एक बार फिर वैश्विक बौद्ध तीर्थ के रूप में स्थापित करता है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु ज्ञान, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की तलाश में पहुँचते हैं।

बोधगया की सड़कों पर गूंजे बुद्ध वंदना मंत्र

पूरी नगरी में बौद्ध परंपरा के पवित्र मंत्र गूंज रहे हैं।

  • सड़कें ध्वजों, रंगीन सजावट और सांस्कृतिक प्रतीकों से सजी हैं
  • श्रद्धालु ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’ जैसे मंत्रों का जाप करते हुए समूहों में आगे बढ़ रहे हैं
  • महाबोधि मंदिर में विश्व शांति हेतु विशेष पूजा हो रही है

यह माहौल न केवल धार्मिक उत्साह बल्कि वैश्विक एकता और मानवता का भी संदेश देता है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम—प्रशासन पूरी तरह सतर्क

श्रद्धालुओं की विशाल भीड़ को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।

  • पुलिस और प्रशासन की विशेष टीमें तैनात
  • सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से निगरानी
  • ट्रैफिक मैनेजमेंट की विशेष व्यवस्था
  • मेडिकल और इमरजेंसी सुविधाएं उपलब्ध

प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के पूजा में शामिल हो सकें, इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

अहिंसा और शांति का संदेश

पूरे आयोजन के दौरान ‘‘अहिंसा परम धर्म’’ का संदेश गूंजता रहा।
बौद्ध गुरु और भिक्षुओं ने लोगों से शांति, सद्भावना और करुणा के मार्ग पर चलने की अपील की।
यह आयोजन वैश्विक समुदाय को यह याद दिलाता है कि बुद्ध का संदेश आज भी दुनिया को एकजुट करने की क्षमता रखता है।

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