भागलपुर में JP आंदोलन के सेनानी वीरेंद्र नारायण सिंह ‘मनोज़’ का निधन, शहर में शोक की लहर

सुबह अचानक हृदय गति रुकने से मौत, समाजसेवा और जनसंघर्षों का रहा लंबा सफर

भागलपुर।भागलपुर शहर ने आज एक ऐसे सपूत को खो दिया जिसकी पहचान सिर्फ एक नेता या जनप्रतिनिधि की नहीं, बल्कि एक संघर्षशील समाजसेवी और जनता के अधिकारों के लिए लड़ने वाले योद्धा की थी।
1974 के ऐतिहासिक जेपी आंदोलन के सक्रिय सेनानी और नगर पालिका के पूर्व वार्ड कमिश्नर वीरेंद्र नारायण सिंह ‘मनोज़’ का आज सुबह हृदय गति रुकने से अचानक निधन हो गया। घटना ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया।

सुबह की सन्नाटा तोड़ गई मनोज के निधन की खबर

परिवार के अनुसार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और कुछ ही मिनटों में हृदय गति रुकने से उनका देहांत हो गया।
खबर फैलते ही क्षेत्र में शोक और अविश्वास का माहौल बन गया। लोगों ने इस खबर को “भागलपुर के एक समर्पित योद्धा की विदाई” बताया।

जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका, जेल तक गए थे मनोज

मनोज़ उन चुनिंदा युवाओं में शामिल थे जिन्होंने जेपी आंदोलन के दौरान लोकतंत्र, न्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। आंदोलन के दौरान वे कई बार संघर्षों और गिरफ्तारी का हिस्सा बने।
उनका मानना था कि “जनता की आवाज से बड़ा कोई हथियार नहीं।” इसी सोच ने उन्हें जीवन भर समाज और व्यवस्था के लिए लड़ने की शक्ति दी।

वार्ड कमिश्नर के रूप में जनता का भरोसा

भागलपुर नगर पालिका में वार्ड कमिश्नर रहते हुए उन्होंने कई विकास कार्यों की शुरुआत कराई।

  • सड़क व नाली निर्माण
  • पेयजल की समस्या का समाधान
  • सफाई व्यवस्था में सुधार
  • वार्ड स्तर पर जनसुनवाई की व्यवस्था

इन कार्यों के कारण उन्हें एक ऐसा जनप्रतिनिधि माना जाता था जो अपनी कुर्सी से अधिक जनता की समस्या को महत्व देता था।

सादगी और मिलनसार स्वभाव ने दिलों में बनाई जगह

मनोज़ का व्यक्तित्व बेहद सरल, सहज और आम जनता के बीच घुलने-मिलने वाला था।
उन्हें बिना पद, बिना गाड़ी-बंगला के — पैदल चलते, गली-मोहल्लों में बैठकर लोगों की बात सुनते हुए देखा जाता था।
इसी वजह से वे सिर्फ नेता नहीं, बल्कि “अपनों के बीच के मनोज” बन गए थे।

नेताओं, संगठनों और आम लोगों का उमड़ा सैलाब

निधन की जानकारी मिलते ही स्थानीय नेताओं, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और शहरवासियों का तांता उनके निवास पर लग गया।
लोगों ने उन्हें विनम्रता, संघर्षशीलता और ईमानदारी की मिसाल बताया।
कई लोगों ने कहा कि मनोज का जाना “भागलपुर के सार्वजनिक जीवन की एक परंपरा के अंत जैसा है।”

परिवार पर टूट पड़ा दुख का पहाड़

परिवार के अनुसार मनोज अपने पीछे

  • एक पुत्र — मोहित सिंह
  • दो बड़ी पुत्रियाँ
  • और पत्नी
    को छोड़ गए हैं।
    अचानक हुई इस घटना से परिवार सदमे में है। लगातार लोग पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दे रहे हैं।

अंतिम यात्रा कल सुबह 11 बजे

परिजनों ने बताया कि मनोज की अंतिम यात्रा कल सुबह 11 बजे उनके आवास से निकाली जाएगी।
अंदाजा है कि शहर भर से बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन को पहुंचेंगे।

समाज ने कहा— “यह अपूरणीय क्षति है”

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि मनोज का योगदान सिर्फ पद तक सीमित नहीं था। वे जरूरतमंदों की मदद, युवा पीढ़ी को प्रेरित करने और शहर के विकास में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।
उनके निधन को सभी ने एक बड़ी क्षति बताया—
“मनोज़ चले गए, पर उनकी विचारधारा, संघर्ष और सादगी हमेशा याद रहेगी।”


 

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