यूनिसेफ की वार्षिक कार्य समीक्षा बैठक सम्पन्न, बच्चों और माताओं के समग्र विकास पर केंद्रित — साझेदारी और मजबूत करने पर सहमति

पटना | 24 नवंबर 2025: राज्य में बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण व संरक्षण को लेकर आयोजित यूनिसेफ की वार्षिक कार्य समीक्षा बैठक आज योजना एवं विकास विभाग के अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय के सभागार में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता बिहार के विकास आयुक्त डॉ. एस. सिद्धार्थ ने की।

बैठक में यूनिसेफ बिहार की प्रमुख सुश्री मार्गरेट ग्वाडा, योजना एवं विकास विभाग के प्रधान सचिव के. सेंथिल कुमार, सामाजिक कल्याण विभाग के सचिव, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, यूनिसेफ टीम और योजना एवं विकास विभाग के पदाधिकारी शामिल हुए।


बैठक का मुख्य फोकस — बच्चों और माताओं पर केंद्रित योजनाओं की समीक्षा

समीक्षा के दौरान राज्य में सामाजिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई, जिनमें —

  • बच्चों का समग्र विकास
  • मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य
  • पोषण और एनीमिया कमी कार्यक्रम
  • स्वच्छता एवं सुरक्षित पेयजल
  • स्कूल शिक्षा और ड्रॉपआउट रोकथाम
  • बाल संरक्षण और सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ

विशेष रूप से उन योजनाओं पर जोर दिया गया जो सीधे तौर पर ग्रामीण और पिछड़े वर्गों तक पहुँच सुनिश्चित करती हैं।


प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर — साझेदारी मजबूत करने पर सहमति

बैठक में कहा गया कि कई योजनाएँ ज़मीनी स्तर पर सकारात्मक असर दे रही हैं, लेकिन और अधिक परिणाम हासिल करने के लिए —

  • इंटर-डिपार्टमेंटल कोऑर्डिनेशन मजबूत करने
  • जागरूकता अभियान बढ़ाने
  • टेक्नोलॉजी-आधारित मॉनिटरिंग को बढ़ावा देने की जरूरत है।

यूनिसेफ और राज्य सरकार दोनों ने सहमति व्यक्त की कि बच्चों व माताओं के जीवन स्तर में सुधार के लिए साझेदारी को और सुदृढ़ किया जाएगा और आने वाले वर्ष में संयुक्त रूप से कई प्रमुख परियोजनाएं तेज गति से लागू की जाएंगी।


विकास आयुक्त ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश

बैठक में विकास आयुक्त डॉ. एस. सिद्धार्थ ने कहा —

“राज्य की जनसंख्या में बच्चों और माताओं की बड़ी हिस्सेदारी है। उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा की दिशा में किए गए प्रत्येक प्रयास का आने वाले दशकों में व्यापक प्रभाव पड़ेगा। सभी विभाग योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को प्राथमिकता दें।”

उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि —

  • प्रगति की रिपोर्ट नियमित रूप से साझा की जाए
  • चिन्हित जिलों में योजनाओं की विशेष मॉनिटरिंग की जाए
  • सेवाओं की पहुँच बढ़ाने के लिए सीधे लाभार्थियों से संवाद स्थापित किया जाए

 

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