बिहार की राजनीति में एक बार फिर नीतीश कुमार का प्रभाव स्पष्ट दिख रहा है। एनडीए विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से नेता चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार दोपहर राज भवन के लिए रवाना हुए। वे मौजूदा मुख्यमंत्री होने के नाते पहले अपना इस्तीफा सौंपेंगे और फिर नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। इस दौरान वह कार्यवाहक मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी निभाते रहेंगे।
गुरुवार सुबह 11 बजे गांधी मैदान में उनका 10वां शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा।
एनडीए में सर्वसम्मति से नीतीश कुमार का नेतृत्व तय
एनडीए विधायक दल की बैठक में भाजपा, जदयू और सहयोगी दलों ने नीतीश कुमार के नाम पर एकमत सहमति जताई। नेताओं ने कहा कि राज्य के विकास के लिए उनका अनुभव आवश्यक है। बैठक के बाद सभी नेता एक साथ राज भवन पहुंचे। राज भवन के आसपास सुरक्षा के बढ़े प्रबंधों के बीच यह राजनीतिक हलचल चरम पर रही।
राज भवन में इस्तीफा और सरकार बनाने का दावा
राज भवन में नीतीश कुमार अपना इस्तीफा सौंपेंगे और नई सरकार बनाने का दावा प्रस्तुत करेंगे। राज्यपाल के द्वारा स्वीकारोक्ति के बाद शपथ ग्रहण की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
नई कैबिनेट में हो सकते हैं बड़े बदलाव
सूत्रों के अनुसार, इस बार मंत्रिमंडल में कई नए चेहरे शामिल हो सकते हैं। विभागों के बंटवारे में भी बदलाव की संभावना है। एनडीए की पहली बैठक में प्रशासनिक सुधार, विकास कार्यों की गति और कानून-व्यवस्था पर रणनीति तय की जाएगी।
नीतीश कुमार बोले— जनता का विश्वास जिम्मेदारी बढ़ाता है
विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार की जनता ने एनडीए पर जो भरोसा दिखाया है, गठबंधन सरकार उस पर खरा उतरेगी। भाजपा नेताओं ने भी स्थिर और सक्रिय शासन देने की प्रतिबद्धता दोहराई।
गांधी मैदान में भव्य शपथ ग्रहण की तैयारी
गुरुवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के लिए तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। जिला प्रशासन, नगर निगम और सुरक्षा एजेंसियों को जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं।
केंद्रीय मंत्रियों, कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राष्ट्रीय नेताओं के शामिल होने की संभावना है।
10वीं बार शपथ— नीतीश कुमार की राजनीति का नया अध्याय
नीतीश कुमार का दसवां शपथ ग्रहण राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। बिहार की राजनीति में कई उतार-चढ़ाव के बावजूद उनका नेतृत्व उन्हें एक अलग पहचान देता है। समर्थक इसे स्थिरता का चिन्ह बता रहे हैं, जबकि विपक्ष बार-बार हो रहे राजनीतिक बदलावों पर सवाल उठा रहा है।
बिहार की राजनीति में तेजी का दौर
बुधवार के इस्तीफे और गुरुवार के शपथ ग्रहण के बीच बिहार की राजनीति में हलचल तेज बनी हुई है। सोशल मीडिया पर भी समर्थन और विरोध के स्वर तेज हैं। फिलहाल, पूरे राज्य की निगाहें गुरुवार सुबह होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं।


