एकतरफा प्यार और जुनून में बैंक मैनेजर ने की थी वारदात, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद—49 दिनों में पूरी हुई सुनवाई

धनबाद: झारखंड के चर्चित निशा कुमारी मर्डर केस में जिला एवं सत्र न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी नीरज आनंद को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला न केवल अपराध की क्रूरताओं के कारण चर्चा में रहा, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की तेजी और पुलिस की सटीक जांच के कारण भी सुर्खियों में रहा। अदालत का यह निर्णय सोमवार को आया, जिसने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के साथ-साथ समाज में सख्त संदेश देने का काम किया।

एकतरफा प्यार, ईर्ष्या और जुनून ने बनाया हत्यारा

जांच में सामने आया कि टाटा म्यूचुअल फंड के ब्रांच मैनेजर नीरज आनंद, जो स्वयं शादीशुदा था, अपनी जूनियर सहयोगी निशा कुमारी के प्रति गहरी आसक्ति और एकतरफा प्रेम रखता था।
जब नीरज को पता चला कि निशा की शादी किसी अन्य युवक से तय हो चुकी है, तो उसके भीतर ईर्ष्या और असहनीय क्रोध भर गया। इसी जुनूनी मानसिकता ने उसे एक खतरनाक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया।

क्रेडिट कार्ड से शादी की तैयारी का खर्च उठाया—ब्लैकमेल प्लान

पुलिस जांच में यह भी पता चला कि नीरज ने निशा की शादी की तैयारियों के लिए अपने क्रेडिट कार्ड से भुगतान किया, ताकि वह उस पर दबाव बना सके और बाद में ब्लैकमेल कर सके।
लेकिन निशा के नौकरी छोड़ देने और लगातार दूरी बनाने के बाद भी नीरज उसकी जिंदगी में दखल देता रहा।

हत्या से एक दिन पहले उसने निशा को 100 से अधिक कॉल और 65 मैसेज भेजकर ऑफिस आने के लिए दबाव बनाया था।

ऑफिस में झांसा देकर बुलाया और बेरहमी से की हत्या

21 जनवरी 2024, रविवार—ऑफिस बंद था।
नीरज आनंद सुबह ही दो घंटे पहले ऑफिस पहुंच गया और वहां छिपकर बैठा रहा। जैसे ही निशा उसकी बातों में आकर ऑफिस पहुंची, उसने उसका रास्ता रोक लिया।

तफ्तीश में सामने आया कि पहले नीरज ने निशा को लगातार मानसिक प्रताड़ना दी और फिर एक धारदार हथियार से उसकी नृशंस हत्या कर दी। वारदात के बाद उसने ऑफिस की सफाई कर सबूत मिटाने की कोशिश की और गेट को बाहर से लॉक कर फरार हो गया।

गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदलता रहा आरोपी

कातिल के फरार होने के बाद पुलिस ने तलाशी अभियान तेज किया।
नीरज तीन दिनों तक बाइक और एंबुलेंस की मदद से लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा ताकि पुलिस के हाथ न लग सके।

लेकिन धनबाद पुलिस की विशेष टीम ने 24 जनवरी को उसे धर-दबोचा। पुलिस के इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और तकनीकी विश्लेषण की वजह से नीरज ज्यादा दिन तक बच नहीं सका।

फॉरेंसिक और डिजिटल सबूतों ने मजबूत की केस डायरी

धनबाद पुलिस ने इस केस को प्राथमिकता देते हुए शुरुआती दिनों से ही तकनीकी साक्ष्य जुटाने पर जोर दिया।

  • फोन कॉल डिटेल्स
  • चैट रिकॉर्ड
  • ऑफिस का CCTV फुटेज
  • फॉरेंसिक रिपोर्ट
  • ब्लड सैंपल
  • मोबाइल लोकेशन

जैसे मजबूत इलेक्ट्रॉनिक और साइबर एविडेंस के आधार पर केवल कुछ ही हफ्तों में ठोस चार्जशीट दायर कर दी गई।

25 गवाहों की गवाही ने केस को और मजबूत किया

अभियोजन पक्ष ने अदालत में 25 गवाह पेश किए, जिनकी गवाही के बाद घटनाओं की पूरी कड़ी स्थापित हो गई।
अपराध अनुसंधान टीम—
रमन कुमार विश्वकर्मा,
साधन कुमार,
रंजीत कच्छप
ने मामले को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सिर्फ 49 दिनों की सुनवाई—कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

अदालत ने मात्र 49 दिनों की सुनवाई में फैसला सुना दिया, जो कि एक गंभीर और जटिल हत्या मामले में बेहद कम समय माना जाता है।
सोमवार को अदालत ने नीरज आनंद को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए कहा कि यह मामला समाज को झकझोरने वाला है और ऐसी मानसिकता के अपराधियों को कड़ी सजा मिलना बेहद जरूरी है।

पीड़ित परिवार ने व्यक्त किया संतोष

निशा के परिवार ने कहा कि उन्हें लंबे समय से इस फैसले का इंतजार था। उन्होंने न्यायालय और धनबाद पुलिस की त्वरित कार्रवाई के लिए आभार जताया।

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