दिव्यांग भाई की शिक्षा के लिए बहन की मेहनत को सलाम, उसे स्कूल ले जाने के लिए खुद चलती है 6Km पैदल

भाई-बहन के रिश्ते का ये आधा सच है कि भाई ही हमेशा बहन की रक्षा करता है. बहन भी भाई की रक्षा के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहती है. एक बहन अपने भाई के लिए हर संघर्ष करती है, वो चाहती है कि उसके भाई का भविष्य सुरक्षित रहे. कुछ ऐसी ही चाह है विदिशा के बेरखेड़ी की एक बहन बहन की. जो अपने भाई के उज्ज्वल के लिए लगातार संघर्ष कर रही है.

भाई को शिक्षा दिलाने के लिए बहन का संघर्ष

Madhya Pradesh Salute to this Sister Who is Helping her brother to earn education

मध्य प्रदेश के विदिशा के बेरखेड़ी की नेहा कुशवाहा अपने भाई को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए रोजाना मेहनत कर रही है. नेहा अपने भाई वंश की उंगली पकड़ कर खुद उसे उच्च शिक्षा और प्रगति की राह पर ले जाने के प्रयास में है. दरअसल, नेहा का भाई वंश दिव्यांग है. उसका स्कूल तीन किलोमीटर दूर है, जिस वजह से वो खुद से स्कूल जाने में सक्षम नहीं है. ऐसी स्थिति में नेहा उसे व्हीलचेयर पर 3 किलोमीटर दूर स्कूल ले जाने के लिए रोजाना पैदल चलती है.

दिव्यांग भाई को रोजाना व्हीलचेयर पर ले जाती है स्कूल

शासकीय माध्यमिक स्कूल रंगाई में कक्षा 8वीं की छात्रा है नेहा अपने भाई को उच्च शिक्षा दिलाने की ज़िद पर अड़ी है और इसके लिए खूब मेहनत कर रही है. उसका स्कूल वंश के स्कूल से आधा किलोमीटर दूर है. ऐसे में वह पहले अपने भाई को स्कूल छोड़ने जाती है. इसके बाद अपने स्कूल आती है. जब वंश के पास व्हीलचेयर नहीं थी तब नेहा उसे गोद में उठाकर लेकर स्कूल ले जाती थी. नेहा ने अपनी इस मेहनत के बारे में कहा कि वह अपने भाई को अनपढ़ नहीं रहने देगी. उसकी पढ़ाई के लिए वह हर मुसीबत का सामना करेगी. इसके साथ ही नेहा का ये संकल्प भी है कि वंश पढ़ाई में अच्छा है जहां तक वह पढ़ना चाहेगा वह उसकी वहां तक हर तरह से मदद करेगी.

बहन ना होती तो पढ़ नहीं पाता भाई

वंश के पिता भारत सिंह कुशवाहा ने नेहा के इस समर्पण के बारे में बताते हुए कहा कि अगर नेहा नहीं होती तो वंश का पढ़ पाना मुमकिन नहीं था. वह वेयरहाउस में बोझ उठाने का काम करते हैं. ससे परिवार का सही से पालन-पोषण भी नहीं हो पाता. दो वक्त के खाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है. ऐसे में हम अपने बच्चों पर भी ध्यान नहीं दे पा रहे हैं. भारत सिंह का कहना है कि नेहा ही उसकी वंश की देखभाल करती है और वह स्कूल भी लेकर जाती है. उसे तैयार करने के साथ साथ उसका होमवर्क भी करती है. वंश उसी की वजह से पढ़ पा रहा है.

वहीं भाई वंश का कहना है कि उसके पापा को काम पर जाना पड़ता है. वो शाम को ही घर लौट पाते हैं. ऐसे में अगर दीदी नहीं होती तो पता नहीं उनका ध्यान कौन रखता. उसकी दीदी ही उसे स्कूल लेकर जाती है. पढ़ती है और उसे अच्छा महसूस कराने के लिए उसके साथ खेलती भी है. वंश का कहना है कि अगर दीदी नहीं होती तो वह पढ़ाई भी नहीं कर पाते, भगवान ऐसी बहन सबको दें.

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