पटना।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार ने ऊर्जा क्षेत्र में बीते दो दशकों में ऐतिहासिक प्रगति की है। वर्ष 2005 में जहां प्रति व्यक्ति बिजली खपत महज 75 यूनिट थी, वहीं वर्ष 2025 में यह बढ़कर 363 यूनिट तक पहुंच गई है।
उन्होंने बताया कि उस समय राज्य में बिजली की उपलब्धता केवल 700 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर 8 हजार मेगावाट से अधिक हो चुकी है।
शुक्रवार को सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा —
“आज शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो चुकी है। बिहार में विकास की हर गली अब रोशनी से जगमगा रही है।”
2005 से पहले अंधेरे में था बिहार, अब आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2005 से पहले बिहार बिजली संकट से जूझ रहा था। राजधानी पटना में भी मुश्किल से 7 से 8 घंटे बिजली मिलती थी। उन्होंने कहा —
“वो दौर सिर्फ बिजली की कमी का नहीं, बल्कि बदइंतजामी और लापरवाही का था। हमने सरकार बनते ही संकल्प लिया कि बिहार को रोशनी से भरना है।”
नीतीश कुमार ने बताया कि 2005 में राज्य की उत्पादन क्षमता 540 मेगावाट थी, जो अब 8850 मेगावाट से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि आज बिहार में ग्रिड उपकेंद्रों की संख्या चार गुना बढ़कर 172, ट्रांसफार्मरों की संख्या 10 गुना बढ़कर 3.50 लाख, और संचरण लाइन की लंबाई तीन गुना बढ़कर 20 हजार किमी तक पहुंच गई है।
किसानों के लिए समर्पित कृषि फीडर, 55 पैसे प्रति यूनिट पर बिजली
मुख्यमंत्री ने बताया कि किसानों तक सस्ती बिजली पहुंचाने के लिए डेडीकेटेड कृषि फीडर बनाए गए हैं।
“किसानों को मात्र 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली दी जा रही है, जिससे सिंचाई की लागत में भारी कमी आई है।”
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी और निजी भवनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की व्यवस्था की गई है, जिससे हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिला है।
‘हर घर बिजली’ निश्चय ने बदल दी तस्वीर
नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2015 में ‘हर घर बिजली’ निश्चय योजना की शुरुआत की थी। निर्धारित समय से दो माह पहले ही, अक्टूबर 2018 में सभी इच्छुक घरों तक बिजली कनेक्शन पहुंचा दिया गया। इसके लिए बड़े पैमाने पर आधारभूत संरचना विकसित की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा, विकास और आत्मनिर्भरता—इन तीनों में संतुलन बनाकर बिहार ने बीते 20 वर्षों में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।


