
पटना। कभी बिहार की पहचान टूटी-फूटी सड़कों, अंधेरे गलियों और बदहाल सरकारी इमारतों से होती थी। लोग राज्य से पलायन करते थे और अपनी पहचान छिपाने को मजबूर थे। लेकिन वर्ष 2005 के बाद जो परिवर्तन यात्रा शुरू हुई, उसने बिहार की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल दी।
2005 में नई सरकार के गठन के बाद राज्य ने विकास के हर मोर्चे पर ऐतिहासिक कदम बढ़ाए। जहां कभी सड़कों का नामोनिशान नहीं था, वहां आज विश्वस्तरीय सड़कें और एक्सप्रेस-वे हैं। नये भवनों के साथ ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण हुआ। बिहार आज देश ही नहीं, दुनिया में भी अपनी नई पहचान बना चुका है।
सड़कों से एक्सप्रेस-वे तक – विकास की गाथा
बीते 20 वर्षों में बिहार में एक नहीं, बल्कि कई विश्वस्तरीय मार्ग बने —
जेपी गंगा पथ, अटल पथ, बिहटा-सरमेरा पथ, मीठापुर-महुली पथ, लोहिया पथ चक्र, बख्तियारपुर-रजौली पथ, पटना-गया-डोभी, पटना-मुजफ्फरपुर फोर लेन जैसे मार्ग आज विकास की रीढ़ बन चुके हैं।
साथ ही वाराणसी-कोलकाता, आमस-दरभंगा, पटना-पूर्णिया, गोरखपुर-सिलीगुड़ी और रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे पर तेजी से काम चल रहा है।
इन परियोजनाओं ने न केवल आवागमन को आसान बनाया है बल्कि व्यापार और रोजगार के अवसरों में भी बेतहाशा वृद्धि की है।
बदलते बिहार की नई पहचान — आधुनिक भवन और संस्थान
राज्य में कई अत्याधुनिक भवन बने हैं जो विकास की नई कहानी कह रहे हैं —
ज्ञान भवन, बापू सभागार, सभ्यता द्वार, बिहार संग्रहालय, बापू परीक्षा परिसर, सरदार पटेल भवन, बापू टॉवर, हज भवन, प्रकाश पुंज, बिपार्ड भवन, वाल्मीकि सभागार, तारामंडल, बिहार सदन (दिल्ली) जैसे निर्माण बिहार के गौरव का प्रतीक बन चुके हैं।
पर्यटन और ईको टूरिज्म में नई उड़ान
राजगीर में घोड़ा-कटोरा, जू-सफारी, ग्लास स्काई वॉक, वेणुवन, पांडु पोखर, नवादा के ककोलत जलप्रपात, मंदार और राजगीर के रोपवे, पटना का बुद्ध स्मृति पार्क, मधुबनी का मिथिला हाट — इन सभी ने बिहार को पर्यटन मानचित्र पर चमका दिया है।
खेल, शिक्षा और विज्ञान में भी मजबूत कदम
राज्य में अब पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, राजगीर खेल अकादमी एवं खेल विश्वविद्यालय, पटना मेट्रो, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साइंस सिटी, बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय (वैशाली), और गया में रबर डैम जैसी परियोजनाएं बिहार की नई सोच को दर्शाती हैं।
पटना संग्रहालय और बिहार संग्रहालय को जोड़ने वाली भूमिगत टनल का काम भी तेजी से चल रहा है।
हवाई सेवाओं में भी बड़ी छलांग
जहां कभी सिर्फ पटना एयरपोर्ट था, वहीं अब दरभंगा और पूर्णिया हवाई अड्डे चालू हो चुके हैं।
बिहटा, रक्सौल, वीरपुर के एयरपोर्ट निर्माणाधीन हैं, जबकि वाल्मीकिनगर, मधुबनी, मुंगेर, सहरसा और मुजफ्फरपुर को हवाई नेटवर्क से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है।
राजकोषीय अनुशासन और विकास का संतुलन
वर्ष 2004-05 में बिहार का बजट जहां केवल 24 हजार करोड़ रुपये था, वहीं आज यह बढ़कर 3 लाख 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
कुशल वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शी शासन ने यह संभव बनाया है कि हर क्षेत्र में योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचे।
“हमने जो कहा, उसे पूरा किया”
सरकार ने जनता से जो वादे किए, उन्हें पूरा किया। अब राज्य एक आत्मविश्वासी, प्रगतिशील और आधुनिक बिहार के रूप में खड़ा है।
“हमने आपके लिए जो काम किए हैं, उसे याद रखिएगा। आगे भी हम ही काम करेंगे — क्योंकि हम जो कहते हैं, उसे निभाते हैं।”


