पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग से ठीक पहले जेडीयू में बगावत थमने का नाम नहीं ले रही है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बागी नेताओं पर सख्त रुख अपनाते हुए दो दिनों में 16 नेताओं पर कार्रवाई की है, जिनमें दो विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और पूर्व विधान पार्षद शामिल हैं।
गोपाल मंडल समेत कई नेताओं पर गिरी गाज
25 अक्टूबर को जेडीयू ने एक विधायक और 11 अन्य नेताओं को निष्कासित किया था।
आज पार्टी ने गोपालपुर से विधायक गोपाल मंडल सहित पांच नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
गोपाल मंडल को इस बार टिकट नहीं दिया गया था। उनकी जगह बुलो मंडल को उम्मीदवार बनाया गया है।
टिकट कटने से नाराज़ गोपाल मंडल ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना दिया और अब निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं।
गोपाल मंडल ने कहा: “मैं जीतकर नीतीश कुमार का ही हाथ मजबूत करूंगा।”
उनके चुनाव मैदान में उतरने से जेडीयू के लिए चुनौती बढ़ गई है, जिसके चलते पार्टी ने यह कठोर कदम उठाया।
महेश्वर यादव और बेटे प्रभात किरण भी निष्कासित
गायघाट के पूर्व विधायक महेश्वर प्रसाद यादव और उनके बेटे प्रभात किरण,
गया जी के पूर्व विधान पार्षद संजीव श्याम सिंह,
और कटिहार कदवा के पूर्व मंत्री हिमराज सिंह को भी जेडीयू से बाहर कर दिया गया है।
मॉनिटरिंग सेल और चुनाव अभियान समिति का गठन
बागियों पर कार्रवाई के साथ-साथ जेडीयू ने चार सदस्यीय मॉनिटरिंग सेल भी गठित किया है,
जो पार्टी के भीतर अनुशासन और प्रचार गतिविधियों पर नजर रखेगा।
इसके अलावा, 197 सदस्यों की जंबो जेट चुनाव अभियान समिति भी बनाई गई है।
इस समिति की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर कर रहे हैं,
जबकि प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा को संयोजक और रंजू गीता को सह-संयोजक बनाया गया है।
2020 की गलती से सबक
2020 के विधानसभा चुनाव में लोजपा के साथ मिलकर बीजेपी के बागियों ने जेडीयू को बड़ा नुकसान पहुंचाया था।
इस बार नीतीश कुमार कोई जोखिम नहीं लेना चाहते।
बागियों पर त्वरित कार्रवाई और मॉनिटरिंग सेल का गठन यही दिखाता है कि
जेडीयू इस बार पहले से ज्यादा सतर्क और आक्रामक मोड में है।


