पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए राज्य की सियासी जमीन अब पूरी तरह गर्म हो चुकी है।जहां एक ओर बीजेपी, राजद, जदयू और रिपब्लिकन (रामविलास) जैसे दलों ने अपने प्रचार अभियान को पूरे जोरों पर ला दिया है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की गतिविधियाँ धीमी नज़र आ रही हैं।
राज्य के लगभग हर जिले में बड़े नेताओं की रैलियाँ, रोड शो और नुक्कड़ सभाएँ लगातार हो रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव जैसे नेता जनता से सीधा संवाद कर रहे हैं। लेकिन, कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व की ग़ैरमौजूदगी पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर डाल रही है।
राहुल गांधी की गैरमौजूदगी से बढ़ा असंतोष
कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी ने “वोट अधिकार यात्रा” के बाद अब तक बिहार का दौरा नहीं किया है। इससे निचले स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष और भ्रम की स्थिति बनती दिख रही है।
गठबंधन (INDIA) के अंदर भी कांग्रेस की निष्क्रियता को लेकर हलचल मची हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति से पार्टी समर्थकों में उत्साह की कमी हो सकती है।
नवंबर–दिसंबर में राहुल का प्रचार अभियान संभव
हालांकि कांग्रेस ने साफ किया है कि राहुल गांधी नवंबर के अंत या दिसंबर की शुरुआत में चुनाव प्रचार की कमान संभालेंगे।
पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक गुलाम अहमद मीर के मुताबिक, राहुल गांधी बिहार चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल का रुख करेंगे, लेकिन उससे पहले बिहार में संगठनात्मक मजबूती पर फोकस रहेगा।
कांग्रेस की रणनीति
कांग्रेस नेतृत्व की रणनीति है कि मतदान के शेष चरणों से पहले जिला, ब्लॉक और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत किया जाए।
राहुल गांधी के दौरे के जरिए कर्मियों में ऊर्जा भरने और गठबंधन की एकजुटता दिखाने का प्रयास किया जाएगा।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार का यह चुनाव कांग्रेस के लिए सिर्फ राज्य की राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक संतुलन के लिए भी एक अहम कसौटी साबित हो सकता है।


