पटना, 21 सितंबर।बिहार सरकार अब बांस की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए किसानों को अनुदान दे रही है। कृषि विभाग का उद्यान निदेशालय राष्ट्रीय बांस मिशन योजना (NBM) के तहत राज्य में बांस की आधुनिक और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा दे रहा है।
इस योजना का मकसद किसानों की आय बढ़ाना, स्वरोज़गार को प्रोत्साहित करना और बागवानी विकास को नई दिशा देना है।
किन जिलों में मिलेगा लाभ?
राष्ट्रीय बांस मिशन योजना का लाभ बिहार के 27 जिलों के किसानों को मिलेगा। इसमें अररिया, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, दरभंगा, पूर्वी चम्पारण, गोपालगंज, जमुई, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मधुबनी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, सहरसा, समस्तीपुर, सारण, शिवहर, शेखपुरा, सीतामढ़ी, सिवान, सुपौल, वैशाली और पश्चिम चम्पारण शामिल हैं।
पहले आओ, पहले पाओ का नियम
- योजना का लाभ पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर दिया जाएगा।
- पति और पत्नी दोनों लाभुक हो सकते हैं, बशर्ते दोनों के नाम पर अलग-अलग भूमि और स्वामित्व प्रमाण पत्र हों।
- आवेदन के साथ भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र, अपडेटेड राजस्व रसीद या वंशावली प्रमाण पत्र अपलोड करना अनिवार्य होगा।
कितना मिलेगा अनुदान?
निजी क्षेत्र में उच्च घनत्व बांस रोपण:
- न्यूनतम रकवा: 0.04 हेक्टेयर (10 डिस्मिल)
- अधिकतम रकवा: 0.20 हेक्टेयर (50 डिस्मिल)
- इकाई लागत: ₹1.20 लाख/हेक्टेयर
- अनुदान: 50% यानी ₹60,000 प्रति हेक्टेयर
- भुगतान: दो वर्षों में (पहले साल 60%, दूसरे साल 40%)
खेत के मेड़ पर बांस रोपण:
- प्रति किसान न्यूनतम 10 पौधे लगाने का प्रावधान
- इकाई लागत: ₹300 प्रति पौधा
- अनुदान: 50% यानी ₹150 प्रति पौधा
- भुगतान: दो वर्षों में (60:40 अनुपात)
सरकार का मकसद
राज्य सरकार का मानना है कि बांस की खेती किसानों के लिए ‘ग्रीन गोल्ड’ साबित हो सकती है। यह न केवल आय का नया स्रोत बनेगा बल्कि बांस से जुड़े उद्योगों और स्थानीय स्तर पर रोजगार को भी बढ़ावा देगा।


