फर्जी वेबसाइट और सिलिकॉन फिंगर प्रिंट से किया जा रहा था आधार डाटा का दुरुपयोग
पटना/भागलपुर/मधेपुरा, 10 सितंबर 2025।बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने आधार फर्जीवाड़े के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। मधेपुरा जिले से रामप्रवेश कुमार, मिथिलेश कुमार और विकास कुमार को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई अपर पुलिस महानिदेशक (EOU) के निर्देशन और पुलिस उप-महानिरीक्षक (साइबर), EOU के मार्गदर्शन में मधेपुरा पुलिस के सहयोग से की गई।
क्या है पूरा मामला?
EOU की साइबर विंग ने ऐसे बड़े साइबर अपराध गिरोह का पर्दाफाश किया, जो नकली वेबसाइट और फर्जी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर आम नागरिकों के आधार डेटा में संशोधन, बायोमेट्रिक चोरी और पहचान पत्रों का दुरुपयोग करता था।
अभियुक्त रामप्रवेश ने 2021 में मैट्रिक पास करने के बाद साइबर कैफे खोला था। शुरू में वह पैन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र और सामान्य फॉर्म भरने का काम करता था। बाद में CSC आईडी मिलने पर उसने आधार डाटा से छेड़छाड़ और फर्जी वेबसाइट बनाने का काम शुरू किया।
उसने ayushman.site, UCL NEHA और UCLAadhaar जैसी 6-7 फर्जी वेबसाइट बनाई, जिन पर लोगों का आधार और बायोमेट्रिक डाटा सेव किया जाता था और बाद में साइबर अपराधियों को बेचा जाता था।
कैसे किया जाता था फर्जीवाड़ा?
- आरोपी ने फर्जी UCL Source Code खरीदा और नकली वेबसाइट बनाई।
- ECMP (आधार सॉफ्टवेयर) को बायपास करने के लिए सिलिकॉन फिंगर प्रिंट का इस्तेमाल किया गया।
- राजस्थान समेत कई राज्यों के लॉगिन आईडी का उपयोग कर आधार में अवैध संशोधन किया जाता था।
- नागरिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का लालच देकर उनसे बायोमेट्रिक और पहचान पत्र लिए जाते थे।
कानूनी कार्रवाई
इस मामले में आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या-23/2025 दर्ज किया गया है। अभियुक्तों पर BNS की धारा 316(3)/338/340(2)/61(2), IT Act की धारा 66/66C/66D/72 और आधार अधिनियम 2016 की धारा 37/38/40/41 के तहत केस दर्ज हुआ है।
UIDAI को रिपोर्ट और आगे की जांच
EOU ने आधार सुरक्षा प्रणाली में सामने आई कमियों को लेकर एक विस्तृत प्रतिवेदन UIDAI को सौंपने की बात कही है। साथ ही, इस गिरोह से जुड़े अन्य व्यक्तियों और नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच जारी है।


