₹3,169 करोड़ की लागत से 177 किमी रेल लाइन का होगा विस्तार, बिहार–झारखंड–बंगाल को मिलेगा लाभ
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने भागलपुर–दुमका–रामपुरहाट सिंगल रेलवे लाइन (177 किमी) के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के पांच जिलों से होकर गुजरेगी और इसकी कुल अनुमानित लागत ₹3,169 करोड़ है।
क्या होगा फायदा
इस रेलवे लाइन के दोहरीकरण से:
- ट्रेनों की गति और समयबद्धता में सुधार होगा।
- भीड़भाड़ वाले सेक्शनों पर भीड़ और जाम की समस्या कम होगी।
- भारतीय रेलवे के परिचालन को अधिक सुरक्षित, कुशल और भरोसेमंद बनाया जा सकेगा।
- यह परियोजना प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बहु-आयामी कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी।
किन जिलों को होगा लाभ
यह रेल प्रोजेक्ट बिहार, झारखंड और बंगाल के 5 जिलों को कवर करेगा और लगभग 441 गाँवों तथा 28.72 लाख आबादी को सीधे रेल सुविधा से जोड़ेगा। इसके साथ ही यह परियोजना 3 आकांक्षी जिलों (बांका, गोड्डा और दुमका) के विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी।
धार्मिक और पर्यटन स्थलों से जुड़ाव
- देवघर (बाबा बैद्यनाथ धाम)
- तारापीठ (शक्ति पीठ)
ये दोनों ही स्थान देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का प्रमुख गंतव्य हैं। रेलवे लाइन के दोहरीकरण से इन जगहों तक पहुंचना और आसान हो जाएगा।
उद्योग और माल ढुलाई को मिलेगा बल
यह रेल रूट कोयला, सीमेंट, खाद, ईंट, और पत्थर जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। परियोजना पूरी होने के बाद:
- हर साल 15 मिलियन टन (MTPA) अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता बनेगी।
- परिवहन लागत घटेगी और स्थानीय उद्योगों को सीधा लाभ होगा।
पर्यावरण और ऊर्जा बचत
रेलवे, सड़क परिवहन की तुलना में ज्यादा पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा-कुशल है। इस परियोजना से:
- 5 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी।
- लगभग 24 करोड़ किलो CO2 उत्सर्जन कम होगा।
- यह लाभ 1 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर होगा।
रोजगार और आत्मनिर्भरता
परियोजना के दौरान हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं, कनेक्टिविटी बेहतर होने से स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे।


