बीईपीसी और एनसीईआरटी की संयुक्त पहल, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने का लक्ष्य
पटना, 09 सितंबर 2025।बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (BEPC) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की संयुक्त पहल पर सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) के लिए मास्टर ट्रेनर्स का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम पटना में शुरू हुआ। यह प्रशिक्षण राज्यभर में शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुधार के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ
प्रशिक्षण का उद्घाटन बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक मयंक वरवड़े, एनसीईआरटी की डीटीई विभाग की प्रमुख प्रो. शरद सिन्हा और राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी एवं समग्र शिक्षा सोशल ऑडिट के नोडल अधिकारी डॉ. उदय कुमार उज्ज्वल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस अवसर पर सोशल ऑडिट सोसाइटी के निदेशक विनय ओहदार, एसआरपी डॉ. ददन राम और अन्य शिक्षाविद उपस्थित थे।
प्रतिभागी और प्रशिक्षण मॉड्यूल
- प्रशिक्षण में कुल 80 प्रतिभागी मास्टर ट्रेनर्स के रूप में शामिल हुए हैं। इनमें सोशल ऑडिट सोसाइटी के जिला संसाधन व्यक्ति, निदेशक एसएएस, एसआरपी, बीईपीसी के वीएसएस एवं मीडिया प्रभारी, प्रशासनिक अधिकारी और राज्य कार्यक्रम अधिकारी शामिल हैं।
- पहले दिन तीन मॉड्यूल पर प्रशिक्षण दिया गया—
- समग्र शिक्षा: क्या, क्यों और कैसे – सहायक प्रोफेसर जितेन्द्र के. पाटिदार (डीटीई विभाग, एनसीईआरटी)
- सामाजिक अंकेक्षण: अवधारणा और आवश्यकता
- डेटा संग्रहण उपकरण एवं रिपोर्टिंग पद्धति
प्रो. विजयन के और एनसीईआरटी के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को अंकेक्षण प्रक्रिया से परिचित कराया।
अंकेक्षण की रणनीति
- प्रत्येक वर्ष राज्य के 20% विद्यालयों का सामाजिक अंकेक्षण करने का लक्ष्य तय किया गया है।
- अगले 5 वर्षों में शत-प्रतिशत विद्यालयों का अंकेक्षण पूरा करने की योजना है।
- ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत सोशल ऑडिट सोसायटी भी इस प्रक्रिया में सहयोग कर रही है।
मुख्य बिंदु और महत्व
सामाजिक अंकेक्षण में जिन पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, वे हैं—
- विद्यालय का बुनियादी ढांचा
- शैक्षिक वातावरण और शिक्षक-छात्र अनुपात
- संसाधनों की उपलब्धता और उनका उपयोग
- वित्तीय प्रबंधन
- विद्यालयों में समुदाय की भागीदारी
कार्यक्रम की खासियत यह है कि अंकेक्षण से प्राप्त निष्कर्ष और सिफारिशें राज्य की शिक्षा नीतियों एवं सुधारात्मक कार्यक्रमों का आधार बनेंगी। इस प्रक्रिया से शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, संसाधनों का कुशल आवंटन करने और कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी।
समापन सत्र में डॉ. उदय कुमार उज्ज्वल ने प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया।


