सांसद अजय मंडल ने लोकसभा में उठाया मछुआरों का मुद्दा, बिहार में 50 हजार परिवारों को मिली आर्थिक सहायता

नई दिल्ली/भागलपुर। भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल ने 12 अगस्त 2025 को लोकसभा में प्रश्न संख्या 3699 के माध्यम से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) पर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से यह जानना चाहा कि कम मछली पकड़े जाने की अवधि में मछुआरा परिवारों को दी जा रही वित्तीय एवं पोषण सहायता की वर्तमान स्थिति क्या है, बिहार में मछलियों के उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, तथा आदर्श मत्स्य ग्राम परियोजनाओं के अंतर्गत बिहार की स्थिति क्या है।

कम मछली पकड़े जाने की अवधि में सहायता
सांसद के प्रश्न पर जवाब देते हुए केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मछली पकड़ने पर प्रतिबंध या मंद अवधि में परंपरागत मछुआरा परिवारों को प्रति परिवार ₹1500 प्रतिमाह की आजीविका व पोषण सहायता दी जाती है। यह सहायता कुल ₹4500 वार्षिक है, जिसमें ₹3000 केंद्र सरकार की ओर से और ₹1500 लाभार्थी का योगदान होता है।

वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक देशभर में औसतन 5.94 लाख मछुआरा परिवारों को इस योजना के अंतर्गत ₹1384.98 करोड़ की सहायता दी गई। इसमें केंद्र का अंश ₹490.84 करोड़ रहा। बिहार में वर्ष 2021-22 में लगभग 50 हजार मछुआरा परिवारों को इस योजना का प्रत्यक्ष लाभ मिला।

मछलियों के उचित मूल्य सुनिश्चित करने के प्रयास
बिहार में मछलियों के मूल्य को स्थिर और उचित बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। पीएम मत्स्य संपदा योजना के तहत राज्य में कुल ₹91.906 करोड़ की लागत से अधोसंरचना विकसित की जा रही है। इसमें 1708 मत्स्य परिवहन इकाइयों की स्थापना, 52 कोल्ड स्टोरेज और आइस प्लांट, एक अत्याधुनिक होलसेल फिश मार्केट, 90 फिश कियोस्क तथा ई-ट्रेडिंग एवं ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, फिश मार्केट प्राइस इन्फॉर्मेशन सिस्टम (FMPIS) की शुरुआत की गई है, जिसके माध्यम से उपभोक्ताओं और मछुआरों को मछलियों के बाजार मूल्य की रियल टाइम जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। बिहार में यह प्रणाली फिलहाल पटना और दरभंगा जिलों में लागू की गई है, जिसे भविष्य में अन्य जिलों तक विस्तारित करने की योजना है।

आदर्श मत्स्य ग्राम परियोजना की स्थिति
आदर्श मत्स्य ग्राम परियोजनाओं के संबंध में मंत्री ने जानकारी दी कि अब तक कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और लक्षद्वीप में ऐसे ग्राम स्वीकृत किए गए हैं। बिहार एक अंतर्देशीय राज्य होने के कारण यहां इस प्रकार की परियोजना लागू नहीं की गई है। हालांकि, राज्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने और मछुआरा परिवारों की आजीविका को मजबूत करने के लिए अन्य योजनाओं के माध्यम से प्रयास जारी हैं।

सांसद अजय मंडल की प्रतिक्रिया
सांसद अजय कुमार मंडल ने लोकसभा में कहा कि बिहार सहित पूर्वी भारत के राज्यों में बड़ी संख्या में मछुआरा परिवार रहते हैं, जिनकी जीविका का मुख्य साधन मछली पालन है। ऐसे में उनके लिए केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुंचना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि वे आगे भी संसद में मछुआरों और किसानों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाते रहेंगे ताकि इन वर्गों की आजीविका सुरक्षित रहे और उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके।


 

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