भागलपुर, 15 अगस्त 2025 —स्वतंत्रता दिवस के उल्लास के बीच नवगछिया के रंगरा प्रखंड के चापर गांव का माहौल गम और गर्व से भर गया। जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करते हुए शौर्य के साथ शहीद हुए बिहार रेजीमेंट के वीर जवान अंकित कुमार का पार्थिव शरीर गुरुवार को उनके पैतृक गांव पहुँचा।
गांव तक पहुँचने का रास्ता बाढ़ के पानी में डूबा था, लेकिन सेना और प्रशासन के जवानों ने हिम्मत नहीं हारी—शहीद को कंधों पर उठाकर पानी पार किया और गांव तक लाए। जैसे ही अंतिम यात्रा गांव में प्रवेश हुई, “शहीद अंकित अमर रहें” और “भारत माता की जय” के नारों से आसमान गूंज उठा।
गांव के हर चेहरे पर आँसू थे, लेकिन आँखों में गर्व की चमक भी। पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में हजारों की भीड़ उमड़ी।
बिहार सरकार के श्रम संसाधन मंत्री एवं भागलपुर के प्रभारी मंत्री संतोष कुमार सिंह भी श्रद्धांजलि देने पहुँचे। उन्होंने शहीद के परिजनों को सरकार की ओर से 21 लाख रुपये का चेक सौंपा और कहा—
“अंकित का बलिदान देश कभी नहीं भूल सकता। पूरा भारत उनके साहस को सलाम करता है।”
अंकित कुमार वर्ष 2009 में बिहार रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। तीनों भाई सेना में रह चुके हैं। वे एक महीने पहले ही छुट्टी बिताकर ड्यूटी पर लौटे थे। अपने पीछे पत्नी, दो बेटे, माता-पिता और पूरा परिवार छोड़ गए।
गांववालों और परिजनों ने सरकार से मांग की कि देश की सुरक्षा के लिए सख्त नीति बनाई जाए, ताकि दुश्मन कभी हमारी ओर आँख उठाकर देखने की हिम्मत न कर सके।


