बिहार में ‘जीविका’ से महिलाओं की जिंदगी में क्रांतिकारी बदलाव

10.63 लाख स्वयं सहायता समूहों के खाते खुले, 57,186 करोड़ का ऋण उपलब्ध

पटना, 14 अगस्त —बिहार में नीतीश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘जीविका’ आज महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की मिसाल बन गई है। ग्रामीण विकास विभाग की इस योजना ने गांव-गांव में महिलाओं को बचत की आदत और कारोबार का हुनर सिखाया है।

आंकड़ों के अनुसार, अब तक 11 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह गठित किए जा चुके हैं, जिनसे 1 करोड़ 40 लाख से अधिक गरीब परिवार जुड़े हैं। इनके तहत 73,510 ग्राम संगठन और 1,680 संकुल स्तरीय संघ काम कर रहे हैं। महिलाएं सिलाई-कढ़ाई, दुकानदारी, डेयरी, खेती और अन्य व्यवसायों से आत्मनिर्भर बन रही हैं।

बैंकों के सहयोग से 10.63 लाख समूहों के बचत खाते खोले गए हैं और 57,186 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है। इस पहल ने महिलाओं को साहूकारों और बिचौलियों से छुटकारा दिलाया है। गांव-गांव में 6,393 बैंक सखी (बैंकर दीदी) वित्तीय साक्षरता और बैंकिंग सेवाएं पहुंचा रही हैं।

इसके अलावा, 83.35 लाख सदस्य बीमा सुरक्षा से जुड़ चुकी हैं, जिससे आपात स्थिति में आर्थिक सहारा मिलता है। नेतृत्व प्रशिक्षण से कई महिलाएं पंचायत स्तर पर निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं का यह सशक्तिकरण आने वाले वर्षों में बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा।


 

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