बिहार में खादी लिख रहा रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय

पटना, 13 अगस्त।बिहार में खादी एवं ग्रामोद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह न केवल परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण अनुकूल उत्पादन, स्थानीय संसाधनों का उपयोग और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में ठोस पहल भी है।

मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा, सामाजिक-आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण है। खादी एवं ग्रामोद्योग योजनाओं के तहत ग्रामीण जनसंख्या को आजीविका के बेहतर अवसर मिल रहे हैं और वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री खादी एवं ग्रामोद्योग योजना के तहत राज्य की खादी संस्थाओं को कई योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है, जिनमें—

  • खादी एवं ग्रामोद्योग प्रशिक्षण योजना
  • राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर खादी मेला-प्रदर्शनी
  • खादी रिवेट योजना
  • ग्रामोद्योग योजना
  • खादी आउटलेट का निर्माण व नवीनीकरण
  • चरखा, करघा, ऊलेन निटिंग मशीन, सिलाई मशीन, कशीदाकारी मशीन की उपलब्धता
  • कार्यशील पूंजी (ऋण) और शेड निर्माण जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

वित्तीय वर्ष 2023-24 में खादी आउटलेट निर्माण एवं नवीनीकरण योजना के तहत खादी मॉल पटना, खादी भवन छपरा (सारण) और खादी भवन आरा (भोजपुर) के लिए कुल 30 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई। वहीं, प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत 2022-23 से अब तक 105 प्रशिक्षणों के माध्यम से 2,625 लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

ग्रामोद्योग योजना में भी सरकार ने अहम सहयोग दिया है—2023-24 में 1 करोड़ रुपये और 2024-25 में 10 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई। इसके साथ ही, खादी और ग्रामोद्योग के प्रचार-प्रसार के लिए समय-समय पर राज्य के विभिन्न स्थानों पर खादी मेलों का आयोजन किया जाता है।

वित्तीय वर्ष 2024-25 में मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, सोनपुर, राजगीर, सीतामढ़ी, सहरसा, पूर्णिया, बांका, औरंगाबाद, मुंगेर और जहानाबाद सहित 12 प्रमुख स्थानों पर खादी मेलों का सफल आयोजन किया गया।

राज्य सरकार का मानना है कि खादी और ग्रामोद्योग न केवल सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने का सशक्त माध्यम भी है।

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