
नई दिल्ली।इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें पद से हटाने के लिए कई सांसदों द्वारा लाए गए प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है और मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है।
जांच समिति के सदस्य
- जस्टिस अरविंद कुमार — सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश
- जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव — चेन्नई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
- बी.बी. आचार्य — कर्नाटक उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता
इस समिति को रिपोर्ट सौंपने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है।
महाभियोग प्रस्ताव कैसे आया?
- 31 जुलाई को बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत 146 सांसदों ने हस्ताक्षरित प्रस्ताव पेश किया।
- प्रस्ताव में न्यायाधीश जांच अधिनियम 1968 की धारा 3, संविधान के अनुच्छेद 124 (4), 217 और 218 के तहत जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की अनुशंसा की गई।
- लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट आने तक प्रस्ताव लंबित रहेगा।
आगे की प्रक्रिया
- यदि जांच समिति जस्टिस वर्मा को दोषी पाती है, तो प्रस्ताव को सदन में चर्चा के लिए लाया जाएगा।
- बहस के दौरान जस्टिस वर्मा या उनके प्रतिनिधि अपना पक्ष रख सकेंगे।
- इसके बाद वोटिंग होगी, जिसमें:
- सदन की कुल संख्या का बहुमत और
- मतदान करने वालों का दो-तिहाई समर्थन
आवश्यक होगा।
- प्रस्ताव पारित होने पर यही प्रक्रिया दूसरे सदन में भी दोहराई जाएगी।
- दोनों सदनों से पारित होने के बाद प्रस्ताव राष्ट्रपति के पास अंतिम निर्णय के लिए भेजा जाएगा।


