पटना:बिहार की राजधानी में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने रिश्तों की परिभाषा ही हिला दी है। 12 साल की शादी, चार बच्चे, और अचानक रिश्ते में लगने वाली ‘बुआ’ की एंट्री… नतीजा — घर उजड़ने की कगार पर!
पीड़िता ने बिहार राज्य महिला आयोग के दरवाज़े पर दस्तक दी है। उसका आरोप है कि उसका पति पिछले एक साल से उसी महिला के साथ रह रहा है, जो पारिवारिक रिश्ते में उसकी बुआ लगती है। और तो और, दो महीने पहले इस महिला ने पति के बच्चे को भी जन्म दिया है।
12 साल सब ठीक, फिर आई ‘बुआ’
पीड़िता का कहना है,
“मई 2002 में मेरी शादी हुई थी। चार बच्चे हैं — दो बेटे, दो बेटियां। पति की डीजे की दुकान है। सब कुछ सही चल रहा था, लेकिन फिर बुआ की एंट्री हुई और सब बदल गया।”
यह महिला, पीड़िता के अनुसार, उसके फूफा-ससुर की ममेरी बहन है — यानि सीधे शब्दों में रिश्ते में बुआ। एक पारिवारिक कार्यक्रम में मुलाक़ात हुई और धीरे-धीरे नज़दीकियां बढ़ने लगीं।
शादीशुदा होने के बावजूद जारी रिश्ता
पीड़िता का आरोप है कि यह ‘बुआ’ पहले से शादीशुदा थी, लेकिन इसके बावजूद पति से उसका रिश्ता चलता रहा। यहां तक कि पीड़िता ने उस महिला के ससुराल में शिकायत भी की, लेकिन दबाव के बाद भी महिला पति के साथ रहने लगी।
“एक दिन पति घर नहीं आए, तो मैं ढूंढते-ढूंढते वहां पहुंची जहां वह महिला के साथ किराए के कमरे में रह रहे थे। मैंने दोनों को साथ में पकड़ा।”
अनाथ पत्नी, बेपरवाह ससुराल
पीड़िता ने कहा,
“मैं अनाथ हूं, मेरी नानी ने शादी करवाई थी। ससुरालवालों को लगता है कि मैं कमजोर हूं, पढ़ी-लिखी नहीं हूं, इसलिए मेरी आवाज दबा देंगे।”
उसने महिला आयोग से गुहार लगाई है कि उसे अपना परिवार वापस मिले, जैसे पहले था।
पति का बयान — “दूसरी के साथ रहूंगा, खर्च दूंगा”
इस मामले में पति का पक्ष सुनकर आयोग के सदस्य भी हैरान रह गए। पति ने साफ कहा —
“मैं दूसरी औरत के साथ ही रहूंगा, लेकिन पत्नी-बच्चों का खर्च उठाऊंगा। पढ़ाई-लिखाई में कोई कमी नहीं आने दूंगा।”
26 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा रेड्डी ने बताया कि अगली सुनवाई 26 अगस्त को रखी गई है, जिसमें सिर्फ पति-पत्नी को बुलाया जाएगा।


