
समस्तीपुर में शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया में बड़ा फर्जीवाड़ा, फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए मनचाही पोस्टिंग का खेल
प्रकाशित तिथि: 5 अगस्त 2025
स्थान: समस्तीपुर, बिहार
बिहार के समस्तीपुर जिले में शिक्षा विभाग की शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले में पहले चरण में किए गए शिक्षकों के विशेष आधार पर तबादलों में फर्जी प्रमाणपत्रों का जमकर दुरुपयोग हुआ है। कई शिक्षकों ने असाध्य रोग, गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, विधवा और पति-पत्नी जैसे संवेदनशील आधारों का गलत इस्तेमाल कर, अपने मनचाहे स्कूलों में पोस्टिंग हासिल की है।
फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाकर घर के पास तैनाती
सूत्रों के अनुसार, कुछ शिक्षकों ने स्वयं, अपने जीवनसाथी, या बच्चों के नाम पर असाध्य रोग का फर्जी प्रमाणपत्र बनवाया, जिससे वे अपने घर के पास के स्कूलों में तबादला कराने में सफल रहे।
विशेष आधार और म्यूचुअल ट्रांसफर के नाम पर हुए इन तबादलों में जिला शिक्षा कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिक्षकों को ‘विशेष सहानुभूति’ दिखाते हुए नियमों को दरकिनार कर पोस्टिंग दी गई है।
नियमों को ताक पर रखकर हुआ म्यूचुअल ट्रांसफर
एक प्रमुख मामला मुजफ्फरपुर की एक नियमित शिक्षिका का है, जिसे पहले कल्याणपुर प्रखंड के भगीरथपुर स्कूल में दूरी के आधार पर ट्रांसफर किया गया था। इसके बाद म्यूचुअल ट्रांसफर के माध्यम से उसे समस्तीपुर शहर के एक प्राथमिक विद्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया — जबकि उस स्कूल में पहले से कोई नियमित शिक्षक कार्यरत नहीं था।
मौजूदा नियमों के अनुसार, म्यूचुअल ट्रांसफर तभी संभव है जब दोनों स्कूलों में समान कोटि के शिक्षक हों। लेकिन यहां ऐसा नहीं था, जिससे स्थानांतरण को नियमों के विरुद्ध माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह शिक्षिका पहले भी उसी स्कूल में लंबे समय तक प्रतिनियुक्ति पर काम कर चुकी थी। इससे स्थानांतरण में ‘सेटिंग’ और साठगांठ की आशंका और गहराती है।
विभागीय नियमों की खुली अनदेखी
शिक्षा विभाग ने म्यूचुअल ट्रांसफर के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं —
- नियमित शिक्षक का ट्रांसफर केवल नियमित शिक्षक से
- विशिष्ट शिक्षक का ट्रांसफर केवल विशिष्ट शिक्षक से
इसके बावजूद कुछ शिक्षकों ने अपने परिवारजनों की फर्जी बीमारियों का हवाला देकर विशेष आधार का अनुचित लाभ उठाया।
एक अन्य मामले में, जिला शिक्षा कार्यालय (DEO) के एक कर्मचारी के रिश्तेदार का ट्रांसफर शहर के प्रमुख स्कूल में करवा दिया गया, जिससे कार्यलय की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।
जानकारों का कहना है कि यदि इन ट्रांसफरों की गहन जांच की जाए, तो कई और गंभीर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
जांच की तैयारी, पूर्व में भी दर्ज हुए हैं केस
जिला प्रोग्राम अधिकारी ने कहा है कि मामला संज्ञान में आने पर जांच की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। गौरतलब है कि मार्च 2025 में विभूतिपुर में 7 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी, जिस पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कार्रवाई की थी।
शिक्षा विभाग ने ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर तबादलों की सूची जारी कर दी है। विभागीय निर्देश के अनुसार, गलत जानकारी देने वाले शिक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
फर्जीवाड़े पर नकेल कसने की तैयारी
समस्तीपुर के जिला शिक्षा अधिकारी को सभी विशेष आधार वाले ट्रांसफरों की समीक्षा कर NIC पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि इस तरह के फर्जीवाड़े पर समय रहते नकेल कसी जा सके।


