पटना/लंदन, अगस्त — बिहार के युवा सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। उन्हें प्रतिष्ठित लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान मिला है और इसके लिए ब्रिटिश पार्लियामेंट में उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया। यह पहला अवसर है जब किसी भारतीय सैंड आर्टिस्ट को यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त हुई है।
ब्रिटिश संसद में मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान
लंदन में आयोजित एक भव्य समारोह में लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अविनाश डी. सकुंडे और यूरोपीय संघ प्रमुख डॉ. इवान गैसीना ने मधुरेंद्र को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र और मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। उनका नाम अब रिकॉर्ड प्रमाणन संख्या LBOWRE401990 के तहत दर्ज हो चुका है।
वैश्विक मंच पर बिहार की रेत कला
यह सम्मान उन्हें उनकी सामाजिक जागरूकता से जुड़ी रेत और पत्तियों की कलात्मक रचनाओं के लिए दिया गया। डॉ. सकुंडे ने कहा, “मधुरेंद्र ने रचनात्मकता और सामाजिक सरोकार को जोड़ते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उनकी कलाकृतियाँ नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।”
5000 से अधिक कलाकृतियों से बना रिकॉर्ड
लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम ने जून 2025 में 10 जून से 17 जून के बीच 12 से अधिक देशों में सर्वे किया। इसमें मधुरेंद्र की 5000 से अधिक रचनाओं को समीक्षा में शामिल किया गया और उन्हें 95% अप्रूवल रेटिंग मिली। उन्होंने अमेरिका, चीन, रूस, कनाडा, यूएन, श्रीलंका जैसे देशों के दिग्गज कलाकारों को पछाड़ते हुए ग्लोबल सैंड आर्टिस्ट श्रेणी में पहला स्थान प्राप्त किया।
देशभर से मिल रही बधाइयाँ
मधुरेंद्र की इस उपलब्धि पर बिहार ही नहीं, पूरे भारत में हर्ष की लहर है। कई प्रबुद्ध जन, शिक्षाविद, कलाकार और राजनेता उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से बधाइयाँ दे रहे हैं। कला जगत के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है, जिसमें एक युवा कलाकार ने मिट्टी से संसार को जोड़ने वाला सेतु बनकर विश्व पटल पर बिहार की पहचान दर्ज की है।
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