भागलपुर | 2 अगस्त 2025:पूर्वी बिहार और सीमांचल में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते हालात बिगड़ने लगे हैं। शनिवार को भागलपुर, बांका और जमुई जिलों में जलसंकट गहराता जा रहा है। भागलपुर के गोराडीह प्रखंड स्थित बड़ी दोस्तानी गांव के पास चांदन नदी और उसकी सहायक कोल्हुआ नदी के तटबंध टूटने की चर्चा है, जिससे कई गांवों में तेजी से बाढ़ का पानी घुसने लगा।
गांवों में कोहराम, लोग छतों पर शरण लिए हुए
स्थानीय लोगों में चर्चा है कि, तीन स्थानों पर तटबंध टूटने से पानी का तेज बहाव गांवों की ओर आ गया है। बड़ी संख्या में लोग अपने घरों की छतों पर शरण लिए हुए हैं, जबकि कई परिवारों ने गांव के ऊंचे मकानों में पनाह ली है। लोग घरों का सामान सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर रहे हैं।
गोराडीह के बीडीओ प्रभात केसरी ने बताया कि मुखिया प्रतिनिधि द्वारा पानी के प्रवेश की सूचना मिली है, और प्रशासन द्वारा सुबह स्थिति का मौके पर निरीक्षण किया जाएगा।
बांका में दीवार गिरने से मासूम की मौत
बांका जिले के कटोरिया प्रखंड अंतर्गत फुलवरिया खुर्द गांव में एक कच्चा मकान बारिश के कारण ढह गया। हादसे में चार माह की बच्ची संजना कुमारी की मौत हो गई। यह घटना तब हुई जब परिवार के सदस्य घर में मौजूद थे और अचानक मिट्टी की दीवार गिर गई।
झाझा में पुल धंसा, मोहन खैरा की मलबे में दबकर मौत
जमुई के झाझा प्रखंड स्थित बरमसिया पुल का एक हिस्सा बारिश के कारण धंस गया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है। वहीं, पचकठिया गांव में एक घर के ढहने से मोहन खैरा (49 वर्ष) की मलबे में दबकर मौत हो गई।
डायवर्जन बहने से टूटा संपर्क
हवेली खड़गपुर–तारापुर मार्ग पर कच्ची मोड़ स्थित डंगरी नदी पर बना डायवर्जन फिर से बह गया है, जिससे तुलसीपुर और टेटियाबंबर से संपर्क भंग हो गया है। ग्रामीणों और यात्रियों को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
गंगा और चांदन—दोनों नदियाँ उफान पर
एक ओर जहां गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया है, वहीं चांदन नदी भी अब तबाही के रूप में सामने आ रही है। शनिवार को चांदन नदी में जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ गया, जिससे बड़ी संख्या में गांव प्रभावित हो गए हैं।
प्रशासन अलर्ट मोड पर, राहत व बचाव की तैयारी
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारी शुरू कर दी गई है। एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है।
बिहार के पूर्वी जिलों में बारिश और बाढ़ की स्थिति विकराल रूप लेने लगी है। तटबंधों का टूटना और पुल-डायवर्जनों का बह जाना इस बात का संकेत है कि मौसम की मार से ग्रामीण आबादी और बुनियादी ढांचा दोनों ही गंभीर खतरे में हैं। ज़रूरत है त्वरित राहत, दीर्घकालिक पुनर्विकास और मौसमीय आपदाओं से लड़ने की योजनाबद्ध तैयारी की।


