
पटना, 02 अगस्त 2025: बिहार सरकार की बहुप्रशंसित योजना ‘जल जीवन हरियाली’ राज्य में पर्यावरणीय संतुलन और जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वर्ष 2019 में शुरू हुए इस अभियान ने पिछले कुछ वर्षों में राज्य के हरित आवरण को विस्तार देने और जल स्रोतों के संरक्षण में ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज की हैं।
5 अगस्त को राज्यभर में ‘जल जीवन हरियाली दिवस’
बिहार सरकार ने निर्देश दिया है कि हर महीने के पहले मंगलवार को ‘जल जीवन हरियाली दिवस’ मनाया जाए। इस वर्ष यह आयोजन 5 अगस्त 2025 को किया जाएगा।
इस मौके पर ‘पौधशाला सृजन एवं सघन वृक्षारोपण’ विषय पर एक राज्यस्तरीय परिचर्चा का आयोजन भी किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सभी विभागों के समन्वय से पर्यावरणीय पहल को और सशक्त बनाना है।
2019 से अबतक – एक नजर में उपलब्धियां
- अभियान की शुरुआत: 2019
- जल संरचनाओं का निर्माण (2019-25): 26,482
- कुल पौधारोपण (2019-25): 20.20 करोड़ पौधे
- 2024-25 का लक्ष्य: 4.67 करोड़ पौधे
- वास्तविक उपलब्धि: 4.14 करोड़ (≈ 90% लक्ष्य प्राप्त)
- 2025-26 का लक्ष्य: 5 करोड़ पौधे, जिनमें 1 करोड़ पौधे अबतक लगाए जा चुके हैं
पारिस्थितिकी सुधार के 11 अवयवों पर कार्य
‘जल जीवन हरियाली’ योजना में कुल 11 प्रमुख अवयवों पर समग्र रूप से कार्य किया जा रहा है, जिनमें शामिल हैं:
- वर्षा जल संचयन
- चेक डैम निर्माण
- नदियों और नालों का संरक्षण
- पौधशालाओं का निर्माण
- सघन वृक्षारोपण
- ऊर्जा संरक्षण, आदि।
इस अभियान को सफल बनाने में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के साथ 15 अन्य हितधारक विभाग जुड़े हैं। विभागों के बीच समन्वय के लिए ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।
प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के साथ महिला भागीदारी भी
इस योजना के ज़रिए न सिर्फ जल संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि महिला स्वयं सहायता समूहों को पौधशालाओं के प्रबंधन एवं पौधारोपण कार्यों में शामिल किया गया है, जिससे उन्हें रोज़गार और सामाजिक भूमिका भी मिल रही है।
अभियान की सफलता में तकनीक और सहभागिता की भूमिका
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वृक्षारोपण और जल संरचनाओं के निर्माण कार्यों की निगरानी जीआईएस मैपिंग, मोबाइल ऐप और फोटोग्राफिक साक्ष्यों के माध्यम से की जा रही है, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो।
मुख्य वन संरक्षक का वक्तव्य
पर्यावरण विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक पी. के. गुप्ता ने बताया कि,
“2025-26 में 5 करोड़ पौधों का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें अबतक 1 करोड़ पौधे रोपित किए जा चुके हैं। यह अभियान सिर्फ वृक्षारोपण नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए हरियाली, जल संरक्षण और जलवायु संतुलन की नींव है।“
‘जल जीवन हरियाली’ बिहार की नीतिगत दूरदर्शिता और पर्यावरणीय प्रतिबद्धता का उदाहरण है। आने वाले वर्षों में यह अभियान न केवल राज्य की पर्यावरणीय गुणवत्ता को सुधारने में अहम भूमिका निभाएगा, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और पारिस्थितिकीय संतुलन भी स्थापित करेगा।


