गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन अलकायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) के राष्ट्रविरोधी प्रचार को बढ़ावा देने के आरोप में झारखंड की मूल निवासी शमा परवीन को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया है। शमा झारखंड के कोडरमा जिले के असनाबाद की रहने वाली है।
क्या है मामला?
गुजरात एटीएस को यह इनपुट मिला था कि शमा परवीन ऑनलाइन माध्यम से अलकायदा की विचारधारा और राष्ट्रविरोधी कंटेंट का प्रचार-प्रसार कर रही थी। सूत्रों के अनुसार, वह सोशल मीडिया और गुप्त ऑनलाइन चैनलों के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की कोशिश कर रही थी। जांच एजेंसियों को उसके खिलाफ पुख्ता डिजिटल साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
झारखंड एटीएस भी जांच में शामिल
झारखंड एटीएस के एसपी ऋषम कुमार झा ने पुष्टि की है कि गुजरात एटीएस द्वारा एक महिला की गिरफ्तारी की सूचना उन्हें प्राप्त हुई है। जल्द ही झारखंड एटीएस की टीम गुजरात और बेंगलुरु जाएगी और महिला से संबंधित सभी पहलुओं की जांच करेगी।
उनका कहना है कि यह भी पड़ताल की जाएगी कि क्या झारखंड में अलकायदा का कोई नेटवर्क सक्रिय है या स्थानीय सहयोगी मौजूद हैं।
कोडरमा पुलिस ने शुरू की स्थानीय जांच
शमा परवीन की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही कोडरमा पुलिस की एक टीम तिलैया थाना क्षेत्र के असनाबाद स्थित उसके पैतृक आवास पर पहुंची। जानकारी के अनुसार:
- शमा ने यह दोमंजिला मकान किराये पर दे रखा है और पिछले 6 वर्षों से बेंगलुरु में रह रही थी।
- मकान के पास ही उसका चचेरा भाई और अन्य परिजन रहते हैं, जिन्होंने बताया कि वह वर्षों से घर नहीं लौटी।
- किराएदार से पूछताछ कर पुलिस ने जानकारी जुटाई है।
पुराना कनेक्शन: अगस्त 2024 की गिरफ्तारी से जोड़ने की कोशिश
इससे पहले अगस्त 2024 में रांची और लोहरदगा से भी डॉ. इश्तियाक समेत आठ संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई थी, जिनका संबंध अलकायदा की गतिविधियों से जोड़ा गया था। अब शमा की गिरफ्तारी ने झारखंड में एक बार फिर आतंकी नेटवर्क की मौजूदगी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या कहती है सुरक्षा एजेंसियां?
- गुजरात एटीएस मामले की गहराई से जांच कर रही है।
- झारखंड एटीएस की टीम शमा के नेटवर्क, संपर्क सूत्रों और डिजिटल गतिविधियों की जांच करेगी।
- फिलहाल शमा को ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया है और उसे गुजरात लाया जा रहा है।
शमा परवीन की गिरफ्तारी झारखंड के लिए एक गंभीर चेतावनी मानी जा रही है। यह मामला न केवल राज्य के भीतर सक्रिय संभावित कट्टरपंथी नेटवर्क का संकेत देता है, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चुनौतीपूर्ण बन गया है। आगामी दिनों में पूछताछ और जांच के बाद और खुलासे संभव हैं।


