बेंगलुरु/कोलार | जुलाई 2025: भारत में पहली बार एक ऐसा रक्त समूह सामने आया है जिसकी अब तक दुनिया में कोई पहचान नहीं थी। कर्नाटक के कोलार जिले की एक महिला में यह अत्यंत दुर्लभ ब्लड ग्रुप मिला है, जिसे वैज्ञानिकों ने ‘क्रिए’ (CRiAi) नाम दिया है।
ब्लड ट्रांसफ्यूजन कॉन्फ्रेंस में हुआ खुलासा
यह महत्वपूर्ण जानकारी इटली के मिलान में आयोजित ब्लड ट्रांसफ्यूजन कॉन्फ्रेंस में सामने आई, जहां भारतीय वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने इस दुर्लभ रक्त समूह का खुलासा किया। बताया गया कि 38 वर्षीय महिला को दिल का दौरा पड़ने के बाद फरवरी 2024 में अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
ब्लड ग्रुप का पता नहीं चल सका
महिला ने स्वयं को O पॉजिटिव बताया, लेकिन जब अस्पताल में उसका ब्लड टेस्ट किया गया तो पाया गया कि उसके खून में कोई नया एंटीजन है, जिससे उसका ग्रुप किसी से मेल नहीं खा रहा।
करीब 20 लोगों के सैंपल जांचे गए, लेकिन किसी का खून उस महिला से मैच नहीं हुआ।
बिना खून चढ़ाए हुआ ऑपरेशन
स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने महिला का बिना ब्लड ट्रांसफ्यूजन ऑपरेशन सफलतापूर्वक कर दिया। उसके बाद बेंगलुरु के रोटी टिशू ब्लड सेंटर में डॉ. अंकित माथुर की देखरेख में महिला का ब्लड सैंपल और उसके परिजनों के सैंपल को ब्रिटेन के ब्लड ग्रुप रेफरेंस लैब भेजा गया। वहाँ 10 महीने तक शोध के बाद वैज्ञानिकों ने इस ब्लड ग्रुप की पहचान की।
कैसा है यह नया ब्लड ग्रुप ‘क्रिए’?
वैज्ञानिकों ने बताया कि महिला के खून में एक नया एंटीजन मौजूद है, जिसे ‘क्रिए’ नाम दिया गया है।
- क्रे (CR) का अर्थ: ‘क्रेमर’
- Ai का अर्थ: इंडिया और बेंगलुरु
डॉक्टरों का कहना है कि यदि भविष्य में महिला को दोबारा सर्जरी की जरूरत पड़ी तो पहले से ही उसका हीमोग्लोबिन स्तर बढ़ा कर शरीर में खून का भंडारण करना होगा।
क्या है इसका महत्व?
यह खोज न केवल भारतीय चिकित्सा विज्ञान के लिए गौरव की बात है, बल्कि दुनिया भर के ट्रांसफ्यूजन विज्ञान के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
यह मामला यह भी दर्शाता है कि कैसे समय रहते सही अनुसंधान और सूझबूझ से जटिल स्वास्थ्य स्थितियों का समाधान संभव है।


