
भागलपुर | 28 जुलाई 2025:मिथिला की सांस्कृतिक पहचान और नवविवाहिताओं की श्रद्धा का प्रतीक मधुश्रावणी व्रत रविवार को पूरे विधि-विधान और आस्था के साथ संपन्न हुआ। यह विशेष व्रत 13 दिनों तक नवविवाहिताएं अपने पति की दीर्घायु, सौभाग्य और पारिवारिक सुख-शांति के लिए करती हैं।
इस अवसर पर मानिकपुर की नवविवाहिता साक्षी ने भी पूरे नियम और भक्ति के साथ यह व्रत संपन्न किया। उन्होंने प्रतिदिन पौराणिक कथाओं का श्रवण, पूजा-अर्चना, और विशेष रूप से नाग-नागिन की पूजा कर परंपरा का निर्वहन किया।
मिथिला परंपरा की छवि
मधुश्रावणी व्रत में नवविवाहिता स्त्रियाँ अपने ससुराल में पहली बार यह धार्मिक अनुष्ठान करती हैं। इस व्रत में वे प्रकृति के विभिन्न रूपों — जैसे पेड़-पौधे, जल, पुष्प, और विशेषतः सांप — के प्रति आभार प्रकट करती हैं। यह परंपरा प्रकृति, प्रेम, और नारी शक्ति के गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाती है।
सामूहिक पूजा और गीत-संगीत का आयोजन
स्थानीय महिलाओं ने भी सामूहिक रूप से गीत, संगीत, और कथा-श्रवण के माध्यम से इस लोकपरंपरा को जीवंत रखा। पूरे इलाके में धार्मिक उल्लास का माहौल रहा, जहां श्रद्धा और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
मधुश्रावणी जैसे पर्व मिथिला की जीवंत परंपराओं को न केवल अगली पीढ़ी तक पहुंचाते हैं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूत करते हैं।


