भागलपुर, 24 जुलाई 2025 — जिले में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं। इस बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं गंगा किनारे के किसान, जिनकी खेतों में लगी सब्जी और अन्य फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी हैं।
कई किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन बाढ़ ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। अब उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। एक किसान ने बताया,
“गंगा के पानी से पूरा खेत डूब गया है, सारी फसल सड़ गई। हमारे पास अब खाने को कुछ नहीं बचा। सरकार से गुहार है कि जल्द से जल्द मुआवजा दे ताकि दोबारा खेती शुरू कर सकें।”
गांवों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ा है। बाढ़ की वजह से खेतों के साथ-साथ रास्ते और ग्रामीण संपर्क मार्ग भी प्रभावित हुए हैं, जिससे आवाजाही और बाजार तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
किसानों की मांग:
- जल्द से जल्द फसल क्षति का आकलन कर मुआवजा दिया जाए
- राहत शिविर और आर्थिक सहायता की व्यवस्था की जाए
- कर्ज माफी या पुनर्गठन पर विचार किया जाए
प्रशासनिक स्तर पर अब तक कुछ क्षेत्रों में जलस्तर की निगरानी और प्राथमिक राहत कार्य शुरू किए गए हैं, लेकिन किसानों को उम्मीद है कि सरकार त्वरित मुआवजा योजना के तहत सहायता पहुंचाएगी।
यह सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि आजीविका की तबाही है, जिससे उबरने के लिए सरकारी सहयोग अत्यंत आवश्यक है।


