
पटना, 20 जुलाई 2025: बिहार के प्रमुख शहरों में नाबालिगों द्वारा ई-रिक्शा चलाना एक गंभीर सड़क सुरक्षा संकट बनता जा रहा है। राज्य के 10 प्रमुख शहरों में करीब 80 हजार ई-रिक्शा चालक नाबालिग हैं, जिससे प्रतिमाह 15 हजार से अधिक सड़क दुर्घटनाएं केवल ई-रिक्शा के कारण हो रही हैं। यह तथ्य सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान परिवहन विभाग द्वारा कराए गए हालिया सर्वे में सामने आया है।
कहां कितने नाबालिग ई-रिक्शा चालक
- पटना: कुल 50 हजार में 25–30 हजार चालक नाबालिग
- भागलपुर: 20 हजार में 10 हजार नाबालिग
- गया: 10 हजार में 6 हजार नाबालिग
- अन्य जिले: मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी, नालंदा, आरा, सोनपुर और वैशाली शामिल हैं
इन 10 जिलों में कुल 1.45 लाख ई-रिक्शा चल रहे हैं, जिनमें से 80 हजार से अधिक नाबालिग चला रहे हैं।
जिला परिवहन कार्यालय का खुलासा
परिवहन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार:
- 5743 ई-रिक्शा चालकों को बिना ड्राइविंग लाइसेंस पकड़ा गया
- इनमें 4076 नाबालिग थे, शेष बालिग लेकिन बिना लाइसेंस
- लाइसेंस कोई और ले रहा है, चालक कोई और बन जाता है
सड़क नियमों की जानकारी नहीं

सर्वे के दौरान यह भी सामने आया कि नाबालिग चालकों को बुनियादी ट्रैफिक नियमों की जानकारी तक नहीं है:
- दाएं-बाएं चलने का सेंस नहीं
- कहीं भी मुड़ जाते हैं
- जेब्रा क्रॉसिंग, ट्रैफिक लाइट, यू-टर्न की जानकारी नहीं
- लाल, हरा, पीला सिग्नल किसका प्रतीक है – नहीं पता
प्रशासन की प्रतिक्रिया
एडिशनल डीटीओ पटनाः पिंकू कुमार ने कहा:
“ई-रिक्शा की खरीद एजेंसियों के माध्यम से होती है, लेकिन चालक को लेकर गंभीरता नहीं बरती जाती। अब इन एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”
तेजी से बढ़ी ई-रिक्शा की संख्या
- वर्ष 2023 में इन 10 शहरों में ई-रिक्शा की संख्या लगभग 30 हजार थी
- अब यह संख्या बढ़कर 1.45 लाख हो गई है
- इस वृद्धि के अनुपात में ओवरलोडिंग, यूटर्न पर पलटना और दुर्घटनाएं भी बढ़ी हैं
क्या है कानून
मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार मोटर से चलने वाले किसी भी वाहन को चलाने के लिए वैध ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य है। लेकिन नाबालिगों को कानूनन ड्राइविंग की अनुमति नहीं है।
बिहार में नाबालिगों द्वारा ई-रिक्शा चलाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि हजारों यात्रियों की जान को जोखिम में डाल रहा है। यदि यह प्रवृत्ति अनियंत्रित रही, तो आने वाले समय में यह बड़ी सड़क त्रासदी का रूप ले सकती है। अब ज़रूरत है कड़ी निगरानी और एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की।


