
भागलपुर | 19 जुलाई 2025: भागलपुर के वृंदावन मैरिज हॉल में शनिवार को “बदलो बिहार, नई सरकार” नागरिक अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस आयोजन को बिहार में जनआंदोलनों, सामाजिक चेतना और वैकल्पिक राजनीति को बल देने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
इस संगोष्ठी के मुख्य वक्ता महात्मा गांधी के प्रपौत्र और प्रसिद्ध सामाजिक विचारक तुषार गांधी थे। उन्होंने अपने वक्तव्य में बिहार की सामाजिक-राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा, “आज़ादी के 75 वर्षों बाद भी अगर आम नागरिक न्याय, शिक्षा, रोज़गार और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी ज़रूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है, तो यह शासन व्यवस्था की विफलता है।”
तुषार गांधी ने गांधीवादी मूल्यों की पुनर्प्रासंगिकता और सामाजिक न्याय आधारित राजनीति की आवश्यकता पर बल दिया।
विचारशील वक्ताओं की भागीदारी
संगोष्ठी में अन्य प्रमुख वक्ताओं में शामिल थे:
- डॉ. सुनील (पूर्व विधायक एवं सांसद)
- विजय प्रताप (समाजवादी चिंतक)
- गुड्डी शाह (युसूफ मेहर अली सेंटर, दिल्ली)
- कुमार चंद्र माली (सामाजिक कार्यकर्ता, झारखंड)
सभी वक्ताओं ने राजनीतिक जागरूकता, नागरिक भागीदारी और वैकल्पिक नेतृत्व की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक अमरनाथ भाई ने की। उन्होंने कहा कि “बिहार की भूमि सामाजिक आंदोलनों की ऐतिहासिक विरासत से समृद्ध रही है और आज भी बदलाव केवल जनचेतना और आंदोलन के ज़रिए संभव है।”
जन संगठनों की साझेदारी
इस कार्यक्रम का आयोजन कई सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयास से हुआ, जिनमें शामिल थे:
गंगा मुक्ति आंदोलन, सीएफडी, राज सेवा दल, लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान, भारत जोड़ो अभियान, सर्वोदय मंडल, संघर्ष वाहिनी समिति, जल समिति और एकता रहें।
वैकल्पिक राजनीति को लेकर संकल्प
संगोष्ठी में भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-युवा, बुद्धिजीवी और आम नागरिक उपस्थित थे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि “अब समय आ गया है कि जनता सिर्फ़ वोटर न रहे, बल्कि बदलाव की निर्णायक शक्ति बने।” संगोष्ठी का उद्देश्य बिहार में जन सरोकार आधारित शासन और वैकल्पिक राजनीति की नींव तैयार करना था।
इस आयोजन को जन-जागरूकता की दिशा में एक ठोस प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।


