पटना, 16 जुलाई।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पिछले दो दशकों में बिहार के बुनियादी ढांचे में जो परिवर्तन आया है, वह ऐतिहासिक और प्रेरणादायक है। वर्ष 2005 में राज्य की कमान संभालने के बाद उन्होंने जिस प्रतिबद्धता से सड़कों, पुलों और संपर्क व्यवस्था के क्षेत्र में योजनाएं बनाईं और ज़मीनी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया, उसका परिणाम है कि आज बिहार का हर गांव सड़कों से जुड़ चुका है और नदियों पर पुलों का एक सशक्त नेटवर्क खड़ा हो चुका है।
सड़क निर्माण में ऐतिहासिक वृद्धि
वर्ष 2005 में बिहार में सड़कों की कुल लंबाई महज 14,468 किलोमीटर थी। 2025 तक यह आंकड़ा 26,081 किलोमीटर तक पहुंच गया है।
- राष्ट्रीय उच्च पथ (NH) की लंबाई 3,629 किलोमीटर से बढ़कर 6,147 किलोमीटर हो गई है।
- राज्य उच्च पथ (SH) 2,382 किलोमीटर से बढ़कर 3,638 किलोमीटर तक पहुँच चुके हैं।
- वृहत जिला पथ की लंबाई 8,457 किलोमीटर से बढ़कर 16,296 किलोमीटर हो चुकी है।
ये आँकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि राज्य के प्रत्येक जिले, प्रखंड और पंचायत तक सड़क संपर्क को प्राथमिकता दी गई है।
पुल निर्माण की नई गाथा
बिहार, जो नदियों का राज्य कहलाता है, वहां पुलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। 2005 से पहले गंगा नदी पर केवल चार पुल थे, जो 1959 से 2001 के बीच बने थे। लेकिन 2025 तक:
- गंगा नदी पर 7 नए पुल बन चुके हैं।
- कोसी नदी पर 2 से बढ़कर 6 पुल हो गए हैं (3 और निर्माणाधीन हैं)।
- गंडक नदी पर 4 नए पुल बने हैं और 3 पर कार्य जारी है।
- सोन नदी पर 2 से बढ़कर अब 6 पुल बन चुके हैं।
रेलवे ओवरब्रिज (ROB) में बड़ा विस्तार
सड़क यातायात को निर्बाध बनाने के लिए रेलवे ओवर ब्रिज की संख्या में भी भारी वृद्धि हुई है।
- वर्ष 2005 में ROB की संख्या सिर्फ 11 थी,
- अब यह बढ़कर 87 हो गई है, जिनमें 40 से अधिक निर्माणाधीन हैं।
ग्रामीण सड़क नेटवर्क ने जोड़ी नई कहानी
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत:
- वर्ष 2025 तक 62,728 गांवों को जोड़ते हुए 64,430 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया है।
- इन सड़कों के दीर्घकालिक रखरखाव के लिए ओपीआरएमसी (Output and Performance-based Road Maintenance Contract) जैसी योजनाएं लागू की गई हैं।
बाईपास और वैकल्पिक मार्गों का विकास
राज्य में 47 नए बाईपास मार्गों को स्वीकृति दी गई है, जिनमें 12 पूरी तरह से बनकर चालू हो चुके हैं। इससे शहरों के अंदर यातायात का दबाव घटा है और आवागमन सुगम हुआ है।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
इन बुनियादी ढांचागत कार्यों का असर केवल यात्रा की रफ्तार पर ही नहीं, बल्कि राज्य के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने पर भी पड़ा है:
- अब छात्र-छात्राएं दूरस्थ स्कूलों और कॉलेजों तक आसानी से पहुंच पा रहे हैं।
- किसान अपनी उपज को शहरों की मंडियों तक तेजी से पहुंचा पा रहे हैं।
- पर्यटन स्थलों तक बेहतर पहुंच के कारण पर्यटन क्षेत्र में भी वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नेतृत्व क्षमता, दूरदर्शिता और कार्यान्वयन की प्रतिबद्धता ने बिहार के गांव-गांव को सड़कों से जोड़ा और नदियों पर पुलों की नई श्रृंखला गढ़ दी। यह विकास न केवल आँकड़ों में, बल्कि लोगों के जीवन में व्याप्त बदलाव के रूप में भी दिखाई देता है। अब बिहार न केवल भौगोलिक रूप से जुड़ा हुआ है, बल्कि विकास की मुख्यधारा में भी मजबूती से खड़ा है।


