नई दिल्ली, 16 जुलाई 2025।भारत सरकार के मंत्रिमंडल ने आज अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की सफल पृथ्वी वापसी पर उन्हें श्रद्धांजलिपूर्वक सम्मानित करते हुए एक विशेष संकल्प पारित किया। यह अवसर भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और वैज्ञानिक क्षमताओं के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ता है।
ISS से वापसी: भारत का पहला अंतरिक्ष यात्री मिशन
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने 25 जून 2025 को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरी थी और 18 दिन का ऐतिहासिक मिशन पूर्ण कर 15 जुलाई को सकुशल धरती पर लौटे। वे भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री बने जिन्होंने ISS पर कदम रखा, और यह मिशन Axiom-4 मिशन और Expedition 73 का हिस्सा था।
प्रयोगों की सूची: भारत की वैज्ञानिक भागीदारी
शुक्ला ने अंतरिक्ष में रहते हुए विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों में भाग लिया, जिनमें प्रमुख हैं:
- माइक्रोग्रैविटी में मांसपेशियों की पुनरुत्पत्ति (Muscle Regeneration)
- शैवाल और सूक्ष्मजीवों की वृद्धि का अध्ययन
- फसलों की अंतरिक्ष में अनुकूलता और उत्पादकता पर प्रयोग
- सायनोबैक्टीरिया जैसे सूक्ष्म जीवों के व्यवहार का विश्लेषण
- मानव मस्तिष्क की संज्ञानात्मक क्षमताओं पर अंतरिक्ष के प्रभाव का अध्ययन
इन प्रयोगों से न केवल अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत की सहभागिता मजबूत हुई, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग में भी भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को दर्शाता है।
मंत्रिमंडल की प्रशंसा और प्रधानमंत्री का विजन
कैबिनेट ने इस अवसर पर ISRO के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और मिशन टीम को हार्दिक बधाई दी और इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक और दूरदर्शी नेतृत्व को भी दिया।
मंत्रिमंडल ने कहा कि,
“प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में भारत ने न केवल चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 जैसे मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, बल्कि अब मानव अंतरिक्ष उड़ानों के क्षेत्र में भी वैश्विक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है।”
अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधार और स्टार्टअप क्रांति
भारत सरकार द्वारा स्पेस सेक्टर में किए गए सुधारों के कारण:
- 300 से अधिक नए स्टार्टअप्स उभरे हैं
- रोजगार और नवाचार को नई दिशा मिली है
- Technology-driven development का एक जीवंत इकोसिस्टम तैयार हुआ है
युवाओं को प्रेरणा, भारत को दिशा
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का यह मिशन केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की प्रेरणा है। इससे वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और नवाचार के प्रति युवाओं की रुचि और बढ़ेगी। कैबिनेट ने कहा कि यह उपलब्धि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को भी नई ऊर्जा देगी।


