पटना, 15 जुलाई 2025:बिहार में ग्रामीण सड़कों की सूरत तेजी से बदल रही है। बिहार ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति 2018 के लागू होने के बाद राज्य के दूरस्थ गांवों तक सड़कें दुरुस्त की जा रही हैं। अब तक 36,372 किलोमीटर से अधिक सड़कों का मरम्मत और अनुरक्षण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।
ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कुल 40,250 किलोमीटर लंबाई की सड़कों की मरम्मत को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 15,342 सड़कों की प्रारंभिक मरम्मत पूरी हो चुकी है।
सबसे आगे रहा पूर्वी चंपारण
जिलावार विश्लेषण में पूर्वी चंपारण जिला सबसे आगे है, जहाँ 2,363.31 किमी ग्रामीण सड़कों का कायाकल्प किया गया। इसके बाद पश्चिम चंपारण (1,979.41 किमी) और मुजफ्फरपुर (1,626.65 किमी) का स्थान है।
शीर्ष 10 जिले (सड़क मरम्मत की कुल लंबाई):
- पूर्वी चंपारण – 2363.31 किमी
- पश्चिम चंपारण – 1979.41 किमी
- मुजफ्फरपुर – 1626.65 किमी
- सारण – 1560.84 किमी
- समस्तीपुर – 1389.73 किमी
- रोहतास – 1358.90 किमी
- गया – 1358.69 किमी
- वैशाली – 1346.46 किमी
- पटना – 1327.37 किमी
- मधुबनी – 1223.01 किमी
18,963 करोड़ की लागत, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल
इस पूरी योजना पर राज्य सरकार द्वारा 18,963 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जा रही है। कुल 16,166 सड़कों को मरम्मत के लिए चिन्हित किया गया है, जिनमें से अधिकांश पर कार्य पूर्ण हो चुका है।
ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने कहा,
“यह सिर्फ सड़कों की मरम्मत नहीं, बल्कि ग्रामीण सशक्तिकरण का एक मिशन है। हमने गांव-गांव तक विकास की रोशनी पहुंचाने के लिए जो संकल्प लिया था, वह अब ठोस परिणाम दे रहा है। यह नीति अब गांवों को शहरों से जोड़ने का एक सशक्त सेतु बन चुकी है।”
बेहतर कनेक्टिविटी से ग्रामीण जीवन में बदलाव
ग्रामीण सड़कों के बेहतर होने से अब:
- गांवों से शहरों तक सुगम आवागमन संभव हुआ है,
- शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और व्यापार को गति मिली है,
- किसान अब अपनी उपज को सरलता से मंडियों तक पहुंचा पा रहे हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि शेष सड़कों का कार्य भी तेजी से चल रहा है और जल्द ही राज्य के सभी ग्रामीण इलाके एक मज़बूत सड़क नेटवर्क से जुड़ जाएंगे।


