
पटना, 15 जुलाई 2025।बिहार में न्याय के साथ विकास के विज़न को आगे बढ़ाते हुए, लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम 2015 के तहत एक अत्यंत मानवीय और प्रेरक उदाहरण सामने आया है। यह कहानी केवल बीमा भुगतान की नहीं, बल्कि शासन की संवेदनशीलता, जनकल्याण की प्रतिबद्धता और एक पिता के धैर्य की असाधारण विजय की कहानी है।
पटना के अनीसाबाद निवासी कामेश्वर प्रसाद आर्य ने अपने पुत्र प्रभात शंकर की दुर्भाग्यपूर्ण रेल दुर्घटना में मृत्यु के बाद बीमा दावा प्रस्तुत किया था। प्रभात शंकर बख्तियारपुर प्रखंड में पंचायत रोजगार सेवक के पद पर कार्यरत थे और 14 अगस्त 2023 को ड्यूटी पर जाते समय हादसे का शिकार हो गए थे।
बीमा का प्रावधान बिहार रूरल डेवलपमेंट सोसायटी (BRDS) और एचडीएफसी बैंक के बीच हुए समझौते के अंतर्गत था। कामेश्वर प्रसाद ने नियमानुसार बीमा दावा दायर किया, परंतु महीनों बीत जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जब यह मामला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के पास पहुंचा, तब BRDS से जवाब मांगा गया और बैंक को भुगतान हेतु पत्र भेजा गया। इसके बाद ग्रामीण विकास विभाग के संज्ञान में लाते ही मनरेगा के आयुक्त ने BRDS और बैंक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि लाभार्थी को शीघ्र बीमा राशि दी जाए।
लोक शिकायत निवारण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम यह हुआ कि एचडीएफसी बैंक ने प्रभात शंकर के आश्रितों के बैंक खाते में ₹10 लाख की बीमा राशि जमा कर दी।
कामेश्वर प्रसाद ने राहत की साँस लेते हुए कहा,
“यदि लोक शिकायत निवारण कानून नहीं होता, तो यह मुआवजा इतनी आसानी से नहीं मिल पाता। मैं इसके लिए शासन का आभार प्रकट करता हूँ।”
जनहित में प्रभावी व्यवस्था
5 जून 2016 से लागू बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के अंतर्गत 17 लाख से अधिक शिकायतों का निवारण सफलतापूर्वक किया जा चुका है। अधिनियम की खासियत यह है कि शिकायतकर्ता को लोक शिकायत कार्यालय में उपस्थित हुए बिना ही https://lokshikayat.bihar.gov.in/ या जन समाधान मोबाइल ऐप के माध्यम से घर बैठे शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है।
नियत समय में समाधान, पारदर्शिता और जवाबदेही की यह प्रणाली अब आम नागरिकों के लिए उम्मीद और भरोसे की नई किरण बन चुकी है।


