दिनांक: 13 जुलाई 2025 | सुल्तानगंज, भागलपुर
“हर हर महादेव” और “बोल बम” के गगनभेदी जयकारों से आज सुल्तानगंज स्थित अजगैबीनाथ धाम गुंजायमान रहा, जब लाखों की संख्या में श्रद्धालु डाक कांवरियों ने पहले सोमवारी के अवसर पर उत्तरवाहिनी गंगा में डुबकी लगाई और बाबा धाम देवघर के लिए रवाना हुए।
24 घंटे की 105 किलोमीटर की आस्था यात्रा प्रारंभ
रविवार को श्रावणी मेला 2025 की पहली सोमवारी की पूर्व संध्या पर उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान कर श्रद्धालु डाक बमों ने गंगाजल भरकर बाबा बैधनाथ धाम, देवघर के लिए कूच किया। डाक कांवरिया विशेष रूप से वह भक्त होते हैं जो 24 घंटे के भीतर लगभग 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा तय करते हैं और बाबा भोलेनाथ को गंगाजल अर्पित करते हैं।
यात्रा की शुरुआत के समय कांवरियों ने “बोल बम”, “हर हर महादेव” के नारे लगाते हुए समूचे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
प्रशासनिक व्यवस्था चाकचौबंद
इस विशाल जनसमूह को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा विशेष सुरक्षा और सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। गंगा घाटों से लेकर मुख्य मार्गों तक:
- पुलिस बल, महिला पुलिस और सैफ के जवानों को संवेदनशील स्थलों पर तैनात किया गया है।
- नगर परिषद द्वारा व्यापक सफाई अभियान, शौचालय और पेयजल की व्यवस्था की गई है।
- गंगा घाट पर नाव की समुचित व्यवस्था और स्नान के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ की टीम भी तैनात है।
- अंचल पदाधिकारी एवं अनुमंडल प्रशासन लगातार निगरानी कर रहे हैं।
श्रद्धा और सुरक्षा का संगम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और आस्था के साथ प्रशासन की सतर्कता इस बात का प्रतीक है कि बिहार सरकार और स्थानीय प्रशासन इस पवित्र आयोजन को सफल बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
श्रावणी मेले के दौरान सुल्तानगंज से देवघर तक का मार्ग कांवरियों के लिए विशेष रूप से सुगम और सुरक्षित बनाए गए हैं।
श्रद्धा की यह अद्भुत झलक
श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए कई दिनों की तैयारी के बाद कांवर लेकर निकलते हैं। कई भक्त नंगे पांव, कुछ पूरी तरह उपवास में, तो कुछ मौनव्रत लेकर यात्रा करते हैं। यह मेला बिहार और झारखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।
श्रावणी मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भक्ति, अनुशासन, संगठन और जनभावना का ऐसा संगम है, जो भारत की सांस्कृतिक परंपरा की जीवंत मिसाल है। आज अजगैबीनाथ धाम में उमड़ा यह जनसैलाब इसी परंपरा की गौरवगाथा सुना रहा है।


