पटना, 13 जुलाई 2025: बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को महागठबंधन के नेताओं के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता कर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य को “पारदर्शिता से रहित” बताते हुए कहा कि यह प्रक्रिया एनडीए को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए चलाई जा रही है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद अब तक आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे आम दस्तावेजों को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि आयोग द्वारा बताए गए 80.11% फॉर्म भरने के आंकड़े में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उनमें से कितने फॉर्म सही, स्वैच्छिक और वैध तरीके से भरे गए हैं।
प्रेसवार्ता में तेजस्वी ने दावा किया कि जमीनी स्तर पर फॉर्म भरने में भारी गड़बड़ियां हो रही हैं। बीएलओ द्वारा मतदाताओं की जानकारी और सहमति के बिना अंगूठा या हस्ताक्षर लगाकर प्रपत्र अपलोड किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयोग की ओर से यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि कितने फॉर्म दस्तावेज के बिना या मतदाता की प्रत्यक्ष भागीदारी के बिना अपलोड किए गए हैं।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि 4.66 करोड़ डिजिटाइज किए गए फॉर्म में से कितनों का आधार से मिलान हुआ है, इस पर भी आयोग चुप्पी साधे हुए है। वहीं, फर्जीवाड़े की आशंका को बल तब मिला जब खबरों में सामने आया कि हजारों प्रपत्र सड़क पर पड़े मिले और देवघर में एक जलेबी विक्रेता के पास भी ये फॉर्म पाए गए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई जिलों में विपक्षी दलों के बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) को सूचना तक नहीं दी गई और उन्हें पुनरीक्षण प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। आयोग द्वारा वेबसाइट पर “सफलता” के जो दावे किए जा रहे हैं, वे जमीनी सच्चाई से मेल नहीं खाते — कई जगह सर्वर डाउन है, कहीं ओटीपी की समस्या है, तो कहीं लॉगिन ही नहीं हो पा रहा है।
महागठबंधन के अन्य नेताओं ने भी इस मौके पर निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए और कहा कि पूरी प्रक्रिया एनडीए के पक्ष में तोड़ी-मरोड़ी जा रही है।
इस मुद्दे पर अब राजनीतिक टकराव और तेज होने के आसार हैं।


