पटना, 11 जुलाई 2025: राजधानी पटना को जल्द ही एक नया सांस्कृतिक और व्यापारिक केंद्र मिलने जा रहा है। गांधी मैदान के सभ्यता द्वार के पास एक अत्याधुनिक और बहुउद्देश्यीय ‘हाट’ का निर्माण शुरू होने जा रहा है, जो बिहार की लोक कला, हस्तशिल्प और संस्कृति को नया जीवन देगा।
₹48.96 करोड़ की लागत, 24 महीने में होगा निर्माण कार्य पूरा
बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड इस परियोजना को कार्यान्वित कर रहा है। लगभग ₹48.96 करोड़ की लागत से यह हाट 24 महीनों में तैयार होगा। यह संरचना तीन मंजिला इम्पोरियम के रूप में विकसित की जाएगी, जो न केवल व्यापार बल्कि सांस्कृतिक प्रदर्शनी का भी केंद्र बनेगा।
आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा नया ‘हाट’
प्रस्तावित हाट में निम्नलिखित सुविधाएं होंगी:
- अंडरग्राउंड और सर्फेस पार्किंग
- दो रेस्टोरेंट व गेम ज़ोन
- फायर फाइटिंग सिस्टम और फायर अलार्म
- लिफ्ट, जल टंकी, सीसीटीवी निगरानी प्रणाली
- सोलर पावर जेनरेशन सिस्टम और स्ट्रीट लाइटिंग
- सुरक्षा हेतु चारदीवारी का निर्माण
लोक कला को मिलेगा स्थायी मंच
यह हाट बिहार की समृद्ध लोककला और हस्तशिल्प परंपरा को प्रदर्शित करने का मंच बनेगा।
प्रदर्शित होने वाली प्रमुख कलाएं और शिल्प:
- मधुबनी पेंटिंग (मधुबनी)
- मंजूषा कला (भागलपुर)
- टिकुली पेंटिंग (पटना)
- सिक्की शिल्प (मिथिला क्षेत्र)
- बांस-बेंत शिल्प (समस्तीपुर)
- मिट्टी व चीनी मिट्टी की कलाएं (दरभंगा)
- चमड़े के उत्पाद – जूते, बेल्ट, बैग (राज्य के विभिन्न भागों से)
- सुजनी कढ़ाई (मुजफ्फरपुर)
- पत्थर शिल्प (गया)
- बूटी कला (नालंदा)
संस्कृति, व्यापार और पर्यटन का संगम
यह हाट न केवल कारीगरों और कलाकारों को मंच देगा, बल्कि स्थानीय व्यापार, पर्यटन, और रोज़गार के नए अवसर भी पैदा करेगा। इसे बिहार की प्राचीन मगधीय विरासत और मिथिला हाट की भावना के अनुरूप डिजाइन किया जा रहा है।


