
पटना, 11 जुलाई 2025: कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए बिहार को एग्रीकल्चर लीडरशिप अवार्ड 2025 से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार राज्य को आंतरिक मत्स्य पालन (इनलैंड फिशरीज) में तेजी से विकास, परिवर्तनकारी नेतृत्व और सतत जलकृषि के माध्यम से ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण के लिए प्रदान किया गया।
डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने ग्रहण किया सम्मान
नई दिल्ली में आयोजित 16वें एग्रीकल्चर लीडरशिप कॉन्क्लेव 2025 में यह पुरस्कार बिहार की ओर से पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने ग्रहण किया।
उन्होंने कहा:
“यह सम्मान राज्य के मत्स्य कृषकों, विभागीय कर्मियों और सरकार के साझा प्रयासों का परिणाम है, जिसने बिहार को आत्मनिर्भर बनाया है।”
बिहार अब मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भर
कुछ वर्ष पूर्व तक बिहार को अपनी मत्स्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन राज्य सरकार की नीतियों, तकनीकी सहयोग, और कृषकों को दी गई सुविधाओं के चलते आज बिहार मत्स्य उत्पादन में न केवल आत्मनिर्भर है, बल्कि अन्य राज्यों को मछली निर्यात भी कर रहा है।
उत्कृष्ट आंकड़े: 101% लक्ष्य प्राप्त, 9.5 लाख मीट्रिक टन उत्पादन
बिहार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में मत्स्य उत्पादन का 101 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करते हुए 9.5 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन किया। यह उपलब्धि जल संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, कृषकों को प्रशिक्षण और अनुदान, तथा आधुनिक उपकरणों की आपूर्ति के माध्यम से संभव हो सकी।
सम्मान समारोह में शामिल हुए प्रमुख व्यक्ति
सम्मान समारोह में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, पूर्व मुख्य न्यायाधीश एवं पुरस्कार समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति पी. सथशिवम, और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। वक्ताओं ने बिहार के मॉडल को देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणादायक बताया।
राज्य सरकार की रणनीति: नीतिगत पहल + तकनीकी नवाचार
- मछली पालन के लिए तालाबों, जलाशयों का पुनरुद्धार
- ग्रामीण मत्स्य पालकों को तकनीकी प्रशिक्षण
- अनुदान और क्रेडिट सहायता
- इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास: फीड मिल, कोल्ड चेन, ट्रांसपोर्ट सुविधाएं
- महिलाओं और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित
बिहार की उपलब्धि: नीति, नवाचार और निष्पादन का संगम
बिहार को मिला यह पुरस्कार नीति, नवाचार और निष्पादन क्षमता का प्रमाण है। यह राज्य के कृषि एवं मत्स्य नीति मॉडल की सफलता की पुष्टि करता है, जिसने रोजगार, आजीविका और राजस्व— तीनों मोर्चों पर प्रभावी परिणाम दिए हैं।


