नई दिल्ली। भारत में सैटेलाइट-आधारित हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) ने अरबपति उद्यमी एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को सेवा संचालन की औपचारिक मंजूरी दे दी है।
इन-स्पेस ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा,
“’मेसर्स स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड’ को ‘लो अर्थ ऑर्बिट’ में स्थित ‘स्टारलिंक जेन1 कॉन्स्टेलेशन’ उपग्रहों के जरिए भारत में उपग्रह संचार सेवाएं प्रदान करने की अनुमति दी गई है।”
5 वर्षों तक वैध रहेगा लाइसेंस
यह सेवा मंजूरी 8 अप्रैल 2025 से पांच वर्ष या ‘जनरेशन-1’ सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन के परिचालन जीवन के अंत तक (जो पहले हो) तक वैध रहेगी।
‘Starlink Gen1 Constellation‘ एक वैश्विक उपग्रह प्रणाली है जिसमें 4,408 उपग्रह पृथ्वी से 540 से 570 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं। यह भारत में लगभग 600 गीगाबिट प्रति सेकंड (Gbps) की कुल क्षमता प्रदान करने में सक्षम होगी।
क्या है सैटेलाइट इंटरनेट?
सैटेलाइट इंटरनेट एक ऐसी तकनीक है जिसमें इंटरनेट सेवाएं तार या मोबाइल टावर के बजाय सीधे उपग्रहों से मिलती हैं। इन उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में स्थापित किया जाता है, जिससे यह तकनीक दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए विशेष रूप से उपयोगी बन जाती है।
कितनी मिलेगी स्पीड?
स्टारलिंक का दावा है कि उसकी सेवाओं से 100 Mbps से 1 Gbps तक की इंटरनेट स्पीड मिल सकती है। हालांकि, इसकी वास्तविक स्पीड मौसम और स्थान पर निर्भर करेगी।
सेवा का उपयोग करने के लिए उपभोक्ताओं को एक विशेष स्टारलिंक डिश और राउटर की आवश्यकता होगी।
2022 से इंतजार कर रही थी स्टारलिंक
स्टारलिंक 2022 से ही भारत में वाणिज्यिक संचालन शुरू करने की कोशिश में थी। लेकिन नियामकीय स्वीकृतियों में देरी के कारण यह संभव नहीं हो सका था। अब इन-स्पेस की मंजूरी के बाद भारत में सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और निवेश दोनों के बढ़ने की संभावना है।


