भागलपुर | 6 जुलाई: भागलपुर शहर की बदहाल स्थिति पर अब नागरिकों की चिंता मुखर होने लगी है। अंग जनपद भारत के बैनर तले शनिवार को स्थानीय होटल में आयोजित परिचर्चा “भागलपुर और हम” में शहर की बदइंतजामी, नगर निगम की निष्क्रियता और स्मार्ट सिटी के खोखले दावों पर तीखी बहस हुई।
इस परिचर्चा में व्यापारी वर्ग, समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों और युवा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने एक स्वर में कहा कि भागलपुर को भले ही स्मार्ट सिटी का तमगा मिल चुका है, लेकिन वास्तविकता इससे उलट है।
“शहर शर्मिंदा करता है”
परिचर्चा में वक्ता विश्वेश आर्य ने स्पष्ट कहा, “कभी-कभी शर्म आती है कहते हुए कि मेरा शहर स्मार्ट सिटी है। नगर निगम अब ‘नरक निगम’ बन चुका है। थोड़ी-सी बारिश में सड़कों पर जलजमाव हो जाता है, और गलियों में कीचड़ भरी रहती है।”
जलजमाव, गंदगी, ट्रैफिक – हर ओर अव्यवस्था
चर्चा के दौरान सफाई व्यवस्था, जल निकासी, ट्रैफिक प्रबंधन और नगर निगम की जवाबदेही जैसे अहम विषयों पर खुलकर बात हुई। वक्ताओं ने कहा कि नगर निगम की निष्क्रियता और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण शहर का मूल ढांचा चरमराने लगा है।
एक अन्य वक्ता ने कहा, “अगर यही हाल रहा, तो भागलपुर स्मार्ट सिटी नहीं, एक प्रशासनिक मज़ाक बनकर रह जाएगा।”
क्या है समाधान?
परिचर्चा में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि केवल आलोचना नहीं, समाधान और जन-जागरूकता की दिशा में ठोस पहल की जरूरत है। नागरिकों ने सामूहिक भागीदारी, स्थानीय निकायों पर जनदबाव, और निरंतर निगरानी को जरूरी बताया।
साफ संकेत है कि भागलपुर की जनता अब चुप नहीं बैठने वाली। ‘स्मार्ट सिटी’ का सपना तब ही साकार होगा, जब नगर निगम अपने दायित्वों को लेकर जवाबदेह बने और जनप्रतिनिधि ज़मीनी मुद्दों को प्राथमिकता दें।


