पटना के गांधी मैदान में 6 जुलाई को होगा ‘विराट विश्व सनातन संस्कृति महाकुंभ’, लाखों सनातनियों के जुटने की तैयारी

पटना। पूर्व केंद्रीय मंत्री और श्रीराम कर्मभूमि न्यास के संस्थापक आदरणीय श्री अश्विनी कुमार चौबे के संरक्षण में 6 जुलाई 2025 को पटना के गांधी मैदान में ऐतिहासिक ‘विराट विश्व सनातन संस्कृति महाकुंभ’ का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर देशभर से महान संत, महामंडलेश्वर, धर्माचार्य, कथा वाचक और सनातन विचारक जुटेंगे।

इस दिव्य महाकुंभ की अध्यक्षता जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज करेंगे। आयोजन में भगवान परशुराम के जीवन आदर्शों और सनातन संस्कृति के मूल्यों को समाज तक पहुँचाने का कार्य किया जाएगा।

आयोजन को लेकर इस्कॉन मंदिर में हुई तैयारी बैठक

महाकुंभ की व्यवस्थाओं को लेकर मंगलवार को पटना के इस्कॉन मंदिर सभागार में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का संचालन अर्जित शाश्वत चौबे ने किया। उन्होंने बताया कि चार महीने पूर्व ‘सनातन संघ भारत जन चेतना’ अभियान के तहत पूरे देश में जागरूकता फैलाई गई, जिससे लाखों सनातनी जुड़ चुके हैं।

महाकुंभ में उठेगा सनातन पुनर्जागरण का संकल्प

कार्यक्रम में भगवान परशुराम की न्यायप्रियता, सनातन संस्कृति की गरिमा और राष्ट्रनिर्माण में सनातनी समाज की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। साथ ही छह प्रमुख संकल्प लिए जाएंगे:

  1. सनातन संस्कृति का पुनर्जागरण
  2. समरस एवं समावेशी समाज का निर्माण
  3. युवाओं में पराक्रम व सनातन जीवन मूल्यों का संचार
  4. राष्ट्रनिर्माण में भगवान परशुराम के आदर्शों की स्थापना
  5. आतंकवाद, अन्याय व भ्रष्टाचार के खिलाफ सनातनी एकजुटता
  6. मठ-मंदिरों के पुजारी व पुरोहितों को उचित सम्मान और संरक्षण

देशभर के संत-महामंडलेश्वर होंगे शामिल

बैठक में मुंबई से आदर्श ब्राह्मण फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशुतोष उपाध्याय, अखिल विश्व कल्याणम के अध्यक्ष मृत्युंजय झा, ब्राह्मण महासभा, चाणक्य विकास मोर्चा, वशिष्ठ मंच, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा समेत दर्जनों सनातनी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

कार्यक्रम का संयोजन डॉ. अर्जित शाश्वत चौबे और संजय चौधरी ने किया। न्यास के अध्यक्ष कृष्णकांत ओझा ने बैठक का संचालन किया, जबकि महामंत्री अभिजीत कश्यप ने विषय प्रवेश कराया।

सभी प्रतिनिधियों ने संकल्प लिया कि 6 जुलाई को गांधी मैदान को सनातन धर्मावलंबियों से भरकर इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाएंगे।

एकता, चेतना और राष्ट्र जागरण का मंच बनेगा यह महाकुंभ

यह आयोजन केवल एक धार्मिक सम्मेलन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जागरण, सामाजिक समरसता और राष्ट्रनिर्माण के दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा।


 

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