गया और भागलपुर मेडिकल कॉलेज का कायाकल्प, पीएमसीएच भी अंतिम चरण में

पटना, 9 जून।प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के तहत बिहार के तीन बड़े मेडिकल कॉलेजों का कायाकल्प किया जा रहा है। इनमें पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) का निर्माण कार्य 90% से अधिक पूरा हो चुका है, जबकि भागलपुर और गया मेडिकल कॉलेज को पहले ही नए स्वरूप में ढाल दिया गया है।

हाल ही में मुख्य सचिव और विकास आयुक्त की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में पीएम पैकेज के तहत चल रही परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

भागलपुर और गया मेडिकल कॉलेज को नया रूप

भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और गया के अनुग्रह नारायण मेडिकल कॉलेज का कायाकल्प पूरा कर लिया गया है। करीब 200-200 करोड़ रुपये की लागत से दोनों कॉलेजों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। इनका उद्घाटन भी पिछले वर्ष केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कर दिया था।

PMCH का कायाकल्प अंतिम चरण में

बिहार के सबसे पुराने और बड़े अस्पताल PMCH का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में है। लगभग 200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से इसके भवन व अन्य संरचनाओं का कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है। आने वाले कुछ महीनों में इसका उद्घाटन संभावित है।

ग्रामीण सड़कों में भी ऐतिहासिक उपलब्धि

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के तहत बिहार में 22,500 किमी सड़क निर्माण का लक्ष्य था, लेकिन उससे भी अधिक 28,645 किमी सड़क बन चुकी है। इस पर 18,909 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों की हिस्सेदारी रही है।

पेट्रोलियम और गैस परियोजनाओं से बढ़ रही संभावनाएं

पीएम पैकेज के तहत पेट्रोलियम और गैस सेक्टर में भी कई बड़े प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं।

  • बरौनी रिफाइनरी का विस्तार 14,810 करोड़ रुपये की लागत से 2026 तक पूरा होगा।
  • आईओसीएल, एचपीसीएल और गेल की कई परियोजनाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं।
  • गेल ने 2,300 करोड़ रुपये खर्च कर 617 किमी लंबी जगदीशपुर-हल्दिया पाइपलाइन भी तैयार कर दी है।

भागलपुर में केंद्रीय विश्वविद्यालय की तैयारी

पीएम पैकेज के हिस्से के रूप में भागलपुर के ऐतिहासिक विक्रमशिला स्थल के पास केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। 500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का डीपीआर बनकर तैयार है और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से मंजूरी का इंतजार है।

आईआईएम बोधगया से शुरू हो चुकी पढ़ाई

बोधगया में 543 करोड़ रुपये की लागत से आईआईएम की स्थापना हो चुकी है और यहां पठन-पाठन कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।


 

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