
सारण, बिहार | जून 2025 — बिहार सरकार ने एशिया के सबसे बड़े पशु मेले सोनपुर मेला को आधुनिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए ₹24.28 करोड़ की योजना को प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। यह योजना स्वदेश दर्शन स्कीम 2.0 की सीबीडीडी (Comprehensive Development of Destination) उप-योजना के अंतर्गत स्वीकृत की गई है।
इस ऐतिहासिक पहल की जानकारी उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दी। उन्होंने बताया कि यह परियोजना स्थानीय रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यटन क्षेत्र को गति देने की दिशा में सरकार का एक अहम कदम है।
क्या-क्या होगा सोनपुर मेले में नया?
इस योजना के तहत सोनपुर मेला को डिजिटल, पर्यावरण-संवेदनशील और विश्व स्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। निम्नलिखित कार्य किए जाएंगे:
- नया प्रवेश द्वार (Gateway Development)
- हाट निर्माण और व्यापारिक अवसंरचना का विकास
- सड़क चौड़ीकरण एवं घाट तक बेहतर कनेक्टिविटी
- पार्किंग ज़ोन और शटल सेवा की शुरुआत
- हरित पहल:
- प्लास्टिक मुक्त मेला क्षेत्र
- अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली
- सौर ऊर्जा आधारित लाइटिंग
- पर्यावरण जागरूकता अभियान
डिजिटल सोनपुर मेला: नई तकनीक से जुड़ेगा पुराना गौरव
पर्यटन को डिजिटल बनाते हुए मेला क्षेत्र में कई स्मार्ट सेवाएं शुरू की जाएंगी:
- मेला मोबाइल ऐप
- कैशलेस भुगतान सुविधा
- वर्चुअल दर्शन की सुविधा
- स्मार्ट पार्किंग सिस्टम
यह पहल पर्यटकों को हाईटेक अनुभव देगी और मेले की ब्रांडिंग को वैश्विक स्तर पर मज़बूती देगी।
सोनपुर मेला: एक सांस्कृतिक और आर्थिक धरोहर
उपमुख्यमंत्री चौधरी ने कहा,
“सरकार सोनपुर मेले को केवल स्थानीय आयोजन के रूप में नहीं देख रही, बल्कि इसे वैश्विक पहचान दिलाने के लक्ष्य पर कार्य कर रही है। इससे रोजगार, व्यापार और पर्यटन—तीनों क्षेत्रों में बड़ी प्रगति होगी।”
सोनपुर मेला, हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा (इस वर्ष 5 नवंबर) से शुरू होता है और एक महीने तक चलता है। गंगा और गंडक के संगम पर लगने वाला यह मेला हाथी, घोड़े, गाय-बैल और अन्य पशुओं की खरीद-बिक्री के लिए प्रसिद्ध रहा है। यह मेला सांस्कृतिक विरासत, ग्रामीण व्यापार और आध्यात्मिक पर्यटन का संगम माना जाता है।
पर्यटन, व्यापार और राजस्व तीनों को मिलेगा लाभ
- उच्च गुणवत्ता की पर्यटक सुविधाओं से देशी और विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि
- व्यापारियों के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, जिससे स्थानीय उत्पादों और पशुधन कारोबार को बढ़ावा
- सरकारी राजस्व में बढ़ोतरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बल


