मुजफ्फरपुर में पुलिस पर महिलाओं की पिटाई का आरोप: वायरल तस्वीरों के बाद तेजस्वी यादव ने उठाई आवाज, जांच के आदेश

मुजफ्फरपुर, 23 मई 2025 – बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के देवरिया थाना क्षेत्र के बंगरा किशनौटा टोला गांव से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। आधी रात को महिलाओं के घरों में घुसकर पुलिस द्वारा बेरहमी से पिटाई करने का गंभीर आरोप सामने आया है। घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।


वायरल तस्वीरों से मचा बवाल, तेजस्वी यादव का सरकार पर हमला

जैसे ही पीड़ित महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ ऐसी बर्बरता निंदनीय है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

तेजस्वी के पोस्ट के बाद प्रशासन हरकत में आया और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) सुशील कुमार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी ग्रामीण एसपी को सौंपी गई है।


क्या बोले एसएसपी?

“एक महिला को बंधक बनाए जाने की सूचना पर पुलिस गांव गई थी। वहां ग्रामीणों ने पुलिस पर हमला किया। इसके बाद कार्रवाई की गई। घटना 17 मई की है, जबकि तस्वीरें 21 को वायरल हुईं, जो संदेहास्पद है। मामले की जांच जारी है।”
– सुशील कुमार, एसएसपी, मुजफ्फरपुर


पीड़ित महिलाओं ने सुनाई आपबीती

पीड़िता महिलाओं ने मीडिया से बातचीत में अपने ऊपर हुए अत्याचार की दास्तां साझा की:

  • “रात एक बजे पुलिस दीवार फांदकर घर में घुसी और छत पर सो रहीं महिलाओं को पीटना शुरू कर दिया। हाथ, पीठ, पैर – कहीं नहीं छोड़ा। अब बैठा भी नहीं जा रहा है।”
  • “मैं मुजफ्फरपुर से लौटी थी, तभी लगभग 50 पुलिसवाले घर में घुस आए। मंगलसूत्र छीन लिया और खेत में ले जाकर छोड़ने की धमकी दी।”
  • “पुलिसवालों ने नशे में धुत होकर 10 हजार रुपये और गहने लूट लिए। दरवाजे पर खड़ी ट्रैक्टर को भी तोड़ दिया।”

पुरुष पुलिसकर्मियों पर लगे गंभीर आरोप

महिलाओं का दावा है कि महिला बल की मौजूदगी के बावजूद पुरुष पुलिसकर्मियों ने ही घरों में घुसकर मारपीट की। इसको लेकर गांव में पुलिस के प्रति गहरा आक्रोश है। घटना में एक दर्जन से अधिक महिलाएं घायल हुई हैं, जिनका इलाज विभिन्न स्थानों पर जारी है।


विवाद की जड़ क्या थी?

गांव की एक युवती के आर्केस्ट्रा डांस को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया था। युवती और उसकी मां ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बाद पुलिस ने बिना किसी जांच के पूरे गांव में ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी।


पुलिस का पक्ष: ग्रामीणों पर पथराव और लूट का आरोप

डायल 112 की पुलिस टीम पर हमले की एफआईआर दर्ज की गई है। 42 नामजद और 30 से 40 अज्ञात लोगों पर पिस्टल और मोबाइल छीनने की कोशिश तथा ईंट-पत्थर से हमला करने का आरोप लगाया गया है। एफआईआर जमादार उपेंद्र कुमार यादव की ओर से दर्ज कराई गई है।


न्याय की मांग, निष्पक्ष जांच की दरकार

घटना ने एक बार फिर पुलिस कार्यप्रणाली और ग्रामीणों के बीच अविश्वास को उजागर कर दिया है। जहां एक ओर पुलिस टीम पर हमले के गंभीर आरोप हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के मानवाधिकारों के हनन की आशंका है। इस मामले में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही बेहद जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।


 

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