बगहा: फर्जी सास-बहू डॉक्टर गिरफ्तार, क्लीनिक से 21 लाख कैश और शराब की बोतलें बरामद

बगहा, बिहार। बिहार के बगहा जिले में एक बड़ा मेडिकल फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां बिना डिग्री के चलाए जा रहे एक फर्जी अस्पताल से पुलिस ने शनिवार को 21 लाख रुपये कैश, शराब की बोतलें और पांच बाइक बरामद की हैं। इस मामले में पुलिस ने कथित फर्जी महिला चिकित्सक उषा सिंह और उसकी बहू महिमा को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना रामनगर थाना क्षेत्र के अर्जुन नगर की है, जहां एक गर्भवती महिला और उसके नवजात की दर्दनाक मौत के बाद यह पूरा मामला उजागर हुआ।


मां और नवजात की मौत बनी कार्रवाई की वजह

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रसव पीड़िता चिंता देवी को शनिवार को दर्द के चलते अर्जुन नगर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जब उसकी हालत बिगड़ने लगी, तब परिजनों ने उसे रेफर करने की मांग की, लेकिन कथित डॉक्टर उषा सिंह ने ऑपरेशन का बहाना बनाकर कोई सुनवाई नहीं की। इलाज के अभाव में चिंता देवी और उसके नवजात की अस्पताल में ही मौत हो गई।


बवाल के बाद छापेमारी, पुलिस पर हमला

मौत की खबर फैलते ही परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही रामनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस जब कार्रवाई करने लगी, तो आरोपी उषा सिंह और उसकी बहू महिमा ने मिर्ची पाउडर और डंडों से पुलिस पर हमला कर दिया और भागने की कोशिश की।

रामनगर की एसडीपीओ दिव्यांजलि जायसवाल के नेतृत्व में की गई त्वरित छापेमारी में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।


भारी मात्रा में नकदी और शराब जब्त

पुलिस छापेमारी में अस्पताल परिसर से 21 लाख रुपये नकद, चार बोतल अंग्रेजी शराब और पांच मोटरसाइकिलें बरामद की गईं। पुलिस को आशंका है कि आरोपी नशे की हालत में ऑपरेशन जैसे गंभीर कार्य भी कर रही थीं।


बिना डिग्री चला रही थीं अस्पताल

पुलिस जांच में सामने आया है कि न तो उषा सिंह और न ही उसकी बहू के पास कोई वैध मेडिकल डिग्री है। इसके बावजूद वे वर्षों से यह क्लीनिक चला रही थीं और खुलेआम गंभीर चिकित्सकीय कार्य कर रही थीं।

एसडीपीओ दिव्यांजलि जायसवाल ने बताया, “हमले और मौत के मामले में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है। दोनों महिलाओं को जेल भेजा जा चुका है। पूरे मामले की जांच की जा रही है।”


परिवार मांग रहा न्याय

मृतका चिंता देवी के पिता सुरेश राम का कहना है कि, “अगर समय रहते मेरी बेटी को रेफर कर दिया गया होता, तो उसकी जान बच सकती थी। ये अस्पताल फर्जी था, इसका हमें कोई अंदाजा नहीं था। अब हम सिर्फ न्याय चाहते हैं।”


यह मामला बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है और ऐसे फर्जी अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत को उजागर करता है।


 

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