सिंधु जल समझौते पर पुनर्विचार से भारत का इनकार, पाकिस्तान की अपील खारिज

नई दिल्ली। भारत द्वारा सिंधु जल समझौता स्थगित करने के फैसले से पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ गई हैं। पाकिस्तानी जल संसाधन मंत्रालय ने भारत के जल शक्ति मंत्रालय को पत्र लिखकर इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की है। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि इस पर पुनर्विचार का कोई सवाल ही नहीं उठता

विदेश मंत्रालय ने ठुकराई गुहार

जल शक्ति मंत्रालय ने पाकिस्तान का पत्र प्रक्रिया के तहत विदेश मंत्रालय को भेज दिया है, जो इस संधि का प्राधिकृत मंत्रालय है। विदेश मंत्रालय ने दो टूक कहा कि “भारत का रुख स्पष्ट है — जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद को समर्थन देता रहेगा, तब तक सिंधु जल समझौते की बहाली पर कोई चर्चा नहीं होगी।

भारत बना रहा नए जल प्रबंधन की रणनीति

भारत सरकार अब सिंधु जल बेसिन की तीन प्रमुख नदियों — सिंधु, झेलम और चेनाब — के जल पर अधिकार के अधिकतम उपयोग की योजना बना रही है। इसके तहत तत्काल, मध्यकालिक और दीर्घकालिक जल परियोजनाओं पर काम शुरू कर दिया गया है।

पाकिस्तान को होता था 80% पानी का लाभ

अब तक के प्रावधानों के अनुसार, पाकिस्तान को इन तीनों नदियों के जल का 80% से अधिक हिस्सा मिलता रहा है। लेकिन पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने जल प्रबंधन को लेकर कड़ा रुख अपनाया। समझौते की स्थगन के बाद भारत ने न केवल पाकिस्तान को मिलने वाला पानी रोक दिया, बल्कि बांधों से पानी छोड़ने की पूर्व सूचना देना भी बंद कर दी।

सरकार के रुख में नहीं कोई नरमी

हालांकि भारत ने संघर्ष विराम के प्रस्ताव को स्वीकार कर सैन्य स्तर पर तनाव कम करने के संकेत दिए हैं, लेकिन जल कूटनीति पर उसका रुख कड़ा बना हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।” यह बयान सरकार की मंशा को दर्शाता है।

“आतंकवाद और मित्रता एक साथ नहीं”: भारत

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने हाल ही में कहा कि “यह संधि सद्भाव और मित्रता की भावना से की गई थी, लेकिन पाकिस्तान ने सीमा-पार आतंकवाद को प्रोत्साहित कर इन मूल्यों का उल्लंघन किया है। ऐसे में भारत संधि की बहाली पर विचार नहीं कर सकता।”

भारत की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई नहीं करता, तब तक सिंधु जल समझौते की बहाली असंभव है। पाकिस्तान की अपील, मौजूदा परिस्थितियों में, भारत की कड़ी जल कूटनीति के आगे टिकती नहीं दिख रही।

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