बिहार महागठबंधन की बैठक में फिर नहीं तय हुआ CM फेस, तेजस्वी यादव बोले- “जो होशियार हैं, वे समझते हैं”

पटना | पॉलिटिकल डेस्क

बिहार की सियासत में सीएम फेस को लेकर सस्पेंस कायम है। महागठबंधन की गुरुवार को कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में हुई बैठक के बाद भी यह साफ नहीं हो सका कि महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा। हालांकि मीडिया के सवालों के जवाब में तेजस्वी यादव ने दावा किया कि पिछली बैठक में ही यह तय हो चुका है, लेकिन उन्होंने नाम लेने से परहेज किया।

तेजस्वी के जवाब से और बढ़ा भ्रम

बैठक के बाद जब तेजस्वी यादव मीडिया से रूबरू हुए, तो उनसे सवाल पूछा गया कि क्या महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा तय हो गया है? इस पर तेजस्वी ने कहा, “पिछली ही बैठक में सब तय हो गया था। जो होशियार हैं वे समझते हैं, जो बेवकूफ हैं वे बेवकूफ हैं।”

उनके इस बयान से न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई, बल्कि खुद पत्रकारों ने बार-बार उनसे स्पष्ट जवाब मांगा, जो उन्हें नहीं मिला।

“ये सवाल आपके लायक का नहीं है”

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेजस्वी यादव ने पत्रकारों पर पलटवार करते हुए कहा, “जो सवाल आप लोगों के लायक नहीं हैं, वो मत पूछिए। ये हम लोगों का काम है, हम लोग तय करेंगे। पहले जाकर NDA से पूछिए उनका सीएम चेहरा कौन है।”

उन्होंने कहा कि NDA में नीतीश कुमार चुनाव तक ही मुख्यमंत्री चेहरा हैं, लेकिन महागठबंधन में जो चेहरा तय होगा, वही चुनाव के बाद मुख्यमंत्री बनेगा।

कांग्रेस और वाम दल चुप्पी साधे हुए

महागठबंधन की पिछली बैठक 17 अप्रैल को आरजेडी कार्यालय में हुई थी। उस बैठक में भी सीएम फेस को लेकर कोई स्पष्टता नहीं आई थी। कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने उस समय कहा था कि वह इस विषय पर पहले ही बोल चुके हैं और अब दोबारा कुछ नहीं कहेंगे। वहीं, वाम दलों ने भी इस मसले पर खुलकर कुछ नहीं कहा।

आरजेडी ने किया था एकतरफा ऐलान

पिछली बैठक के बाद आरजेडी ने अपने प्रवक्ताओं मनोज झा और मृत्युंजय तिवारी के माध्यम से तेजस्वी यादव को सीएम फेस घोषित किया था, लेकिन कांग्रेस और वाम दलों ने इस पर कोई समर्थन नहीं जताया।

सवाल उठता है – तेजस्वी किसे ‘होशियार’ मान रहे हैं?

अब तेजस्वी यादव कह रहे हैं कि सीएम फेस पिछली बैठक में ही तय हो गया था, लेकिन नाम लेने से कतरा रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि तेजस्वी किसे होशियार और किसे बेवकूफ कह रहे हैं? क्या महागठबंधन के घटक दलों के बीच अंदरूनी असहमति है या रणनीति के तहत सस्पेंस बनाए रखा जा रहा है?

चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही महागठबंधन पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह जल्द से जल्द अपना नेता घोषित करे, वरना भ्रम की स्थिति मतदाताओं पर नकारात्मक असर डाल सकती है।

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