पटना में भीषण सड़क हादसा, घायलों के मददगार बने पप्पू यादव, निजी वाहन से पहुंचाया अस्पताल

पटना के जगदेव पथ पर शनिवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जिसमें दंपति समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई, लेकिन दुखद बात यह रही कि लोग मदद करने के बजाय मोबाइल से वीडियो बनाने में व्यस्त नजर आए। मृतकों की पहचान एम्स नवादा निवासी अशोक कुमार (50) और उनकी पत्नी पुष्पा देवी (45) के रूप में हुई है। यह हादसा तब हुआ जब बिहार सरकार लिखी एक तेज रफ्तार सफारी गाड़ी ने ऑटो और बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गाड़ी में सवार सभी लोग शराब के नशे में धुत्त थे।

अपनी दुकान से लौट रहे थे दंपति, सफारी ने रौंद डाला

मृतका पुष्पा देवी के भाई धीरेन्द्र कुमार ने बताया कि अशोक कुमार की हार्डवेयर की दुकान थी और हादसे के वक्त वह अपनी पत्नी के साथ दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। जगदेव पथ स्थित पिलर संख्या 9 के पास अचानक एक तेज रफ्तार सफारी गाड़ी ने उनकी बाइक और एक ऑटो को टक्कर मार दी। हादसे में दंपति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि ऑटो में सवार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

MP पप्पू यादव बने मसीहा, घायलों को अस्पताल पहुंचाया

इस हादसे के दौरान पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव वहां से गुजर रहे थे। जब उन्होंने घायलों को तड़पते देखा, तो तुरंत अपनी गाड़ी रोकी और सभी घायलों को अपनी गाड़ी से IGIMS अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल पहुंचते ही वहां की अव्यवस्था देख पप्पू यादव भड़क गए। उन्होंने नाराजगी जताते हुए स्टाफ से कहा, “यहां कोई डॉक्टर है या नहीं? मरीजों को देखने वाला कोई है?” इसके बाद अस्पताल के कर्मचारी दौड़ते हुए आए और घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया।

नशे में धुत्त थी सफारी गाड़ी, पुलिस ने जब्त किया वाहन

प्रत्यक्षदर्शियों और घायलों के अनुसार, सफारी गाड़ी में बैठे सभी लोग शराब के नशे में थे। लोगों ने बताया कि गाड़ी में शराब की बोतलें भी मौजूद थीं।
फिलहाल, पुलिस ने सफारी गाड़ी को जब्त कर लिया है और उसमें सवार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। यह घटना बिहार में शराबबंदी की हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

वीडियो बनाने में व्यस्त रहे लोग, किसी ने नहीं की मदद

घटना के बाद लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, लेकिन किसी ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने की जहमत नहीं उठाई। इसके बजाय, लोग मोबाइल से वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर शेयर करने में लगे रहे। यह घटना समाज की गिरती संवेदनशीलता को उजागर करती है। क्या अब मदद करने की भावना खत्म हो चुकी है?

प्रशासन और शराबबंदी कानून पर उठे सवाल

इस दर्दनाक हादसे ने बिहार की शराबबंदी और ट्रैफिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब राज्य में शराबबंदी लागू है, तो आखिर शराब गाड़ी में कैसे पहुंची? नशे में धुत्त लोगों को गाड़ी चलाने की इजाजत कैसे मिली? अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगा या फिर यह भी एक आम घटना बनकर रह जाएगी?

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