सरकार ने MSME के विकास के लिए किया ऐतिहासिक समझौता, 80,000 उद्यमियों को मिलेगा प्रशिक्षण

पटना: उद्योग विभाग ने आरएएमपी (Raising and Accelerating MSME Performance – RAMP) कार्यक्रम के तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को मजबूत करने के लिए एक विशेष उद्यमिता विकास कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम के तहत एमएसएमई को वैश्विक बाजार के अनुरूप तैयार करने, उनकी दक्षता बढ़ाने, वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने और नेतृत्व कौशल को विकसित करने का लक्ष्य है।

केंद्र सरकार और विश्व बैंक के सहयोग से चलने वाले इस कार्यक्रम के तहत विभिन्न संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इनमें राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (NIESBUD), चाणक्य प्रबंधन संस्थान (पटना), भारतीय प्रबंधन संस्थान (बोधगया), केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET, वैशाली) और भागलपुर स्थित AMHSSC शामिल हैं। ये संस्थान राज्यभर में 80,000 एमएसएमई को गैर-आवासीय प्रशिक्षण प्रदान करेंगे, जिससे वे प्रतिस्पर्धात्मक व्यावसायिक वातावरण में सफल हो सकें।

एमएसएमई को मिलेगा व्यापक प्रशिक्षण

इस विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल में डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता, उत्पादन प्रक्रिया, नेतृत्व विकास, विपणन रणनीति और क्लस्टर विकास जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य एमएसएमई उत्पादों को घरेलू और वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना और उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

आरएएमपी योजना के तहत बिहार के 5 प्रोजेक्ट को 135 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसके माध्यम से राज्य की 1 लाख एमएसएमई इकाइयों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सभी जिलों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

इस कार्यक्रम में जीआई टैग प्राप्त उत्पादों के निर्यात को भी विशेष रूप से बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे राज्य के पारंपरिक और विशिष्ट उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के दौरान उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा, उद्योग विभाग में तकनीकी विकास निदेशक शेखर आनंद, सहायक उद्योग निदेशक निशा कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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